नेतृत्व के मुद्दे पर चल रही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने 19 दिसंबर को विधानसभा में कहा था कि वे अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कांग्रेस हाईकमान उनके पक्ष में है और ढाई साल के फार्मूले पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा था कि उन्होंने और मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कांग्रेस हाईकमान की मौजूदगी में एक समझौता किया है और दोनों उसका पालन करेंगे।
सत्तारूढ़ कांग्रेस Congress में नेतृत्व परिवर्तन को लेकर चल रही अटकलों के बीच गृह मंत्री डॉ. जी. परमेश्वर ने मंगलवार को कहा कि यदि कांग्रेस आलाकमान को राज्य में नेतृत्व के मुद्दे पर कोई निर्णय लेना है, तो उसे फरवरी में बजट की तैयारी शुरू होने से पहले कर लेना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नेतृत्व बदला जाना चाहिए या नहीं, इसका फैसला पूरी तरह कांग्रेस आलाकमान के अधिकार क्षेत्र में है।
नेतृत्व परिवर्तन को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में परमेश्वर ने कहा, बजट की तैयारी फरवरी में शुरू होगी। अभी लगभग एक महीना है। अगर आलाकमान को इस विषय पर कोई निर्णय लेना है, तो उससे पहले लेना चाहिए। उन्होंने कहा, किसी को तो बजट तैयार करना होगा। राज्य की जनता से किए गए वादों के आधार पर बजट पेश किया जाएगा और यह प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
नेतृत्व परिवर्तन की अटकलों के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या पहले ही यह कह चुके हैं कि वे अगले वर्ष अपना रिकॉर्ड 17वां बजट पेश करेंगे। मुख्यमंत्री के पास वित्त विभाग भी है। उन्होंने इस साल मार्च में 16वां बजट पेश किया था। वर्ष 2026-27 का बजट अगले साल मार्च में पेश होने की संभावना है।
हाल ही में कांग्रेस कार्य समिति की बैठक के दौरान दिल्ली में कुछ लोगों के प्रदर्शन कर परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनाए जाने की मांग पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा, जो लोग कहते हैं कि परमेश्वर को मुख्यमंत्री बनना चाहिए, उन्होंने यह मेरे प्रति स्नेह के कारण कहा होगा। मैं उनसे ऐसा कहने से कैसे रोक सकता हूं? उन्होंने कहा कि कांग्रेस हाईकमान के पास पूरी जानकारी होती है। वे संबंधित महासचिव से भी जानकारी लेते हैं और अपने स्तर पर भी तथ्यों को परखते हैं। उन्हें पता है कि क्या फैसला लेना है और कब लेना है।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रह चुके परमेश्वर ने पिछले महीने यह भी कहा था कि वे मुख्यमंत्री पद की दौड़ में हैं। नेतृत्व में बदलाव की स्थिति में कांग्रेस के भीतर दलित मुख्यमंत्री की मांग भी उठ रही है, जिसमें परमेश्वर को प्रमुख दावेदार माना जा रहा है। पार्टी के भीतर यह अटकलें भी हैं कि यदि नेतृत्व में बदलाव होता है, तो सिद्धरामय्या गुट मुख्यमंत्री पद के लिए परमेश्वर या अन्य वरिष्ठ नेताओं का समर्थन कर सकता है।
कांग्रेस विधायक इकबाल हुसैन के इस बयान पर कि 6 या 9 जनवरी को उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार के मुख्यमंत्री बनने वाले बयान के बारे में पूछे जाने पर परमेश्वर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, अगर इकबाल हुसैन ने कह दिया है, तो यह फाइनल ही होगा। मैं इसे मानूं या न मानूं, यह सवाल नहीं है।
इस बीच, नेतृत्व के मुद्दे पर चल रही चर्चाओं के बीच मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने 19 दिसंबर को विधानसभा में कहा था कि वे अपने पद पर बने रहेंगे। उन्होंने यह भी दावा किया था कि कांग्रेस हाईकमान उनके पक्ष में है और ढाई साल के फार्मूले पर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा था कि उन्होंने और मुख्यमंत्री सिद्धरामय्या ने कांग्रेस हाईकमान की मौजूदगी में एक समझौता किया है और दोनों उसका पालन करेंगे।