मंगल प्रवेश से पहले शोभायात्रा में निकली
बेंगलूरु. राजाजीनगर धर्म स्थानक में साध्वी संयमलता, अमितप्रज्ञा, कमलप्रज्ञा, सौरभप्रज्ञा आदि ठाणा का शनिवार को हर्षोल्लास से चातुर्मास मंगल प्रवेश हुआ। मंगल प्रवेश से पहले शोभायात्रा में निकली।
मंगलाचरण के बाद त्रिशला महिला मंडल, बहु मंडल ने स्वगात गीत पेश किया। धर्मसभा में साध्वी संयमलता ने कहा कि चातुर्मास वह चाबी है जो जीवन की हर समस्या के ताले को खोलती है। परिस्थिति नहीं मन:स्थिति को बदलने का अवसर है। चातुर्मास साधु-साध्वियों के लिए ही नहीं श्रावक श्राविकाओं के लिए भी आत्मा की उन्नति लाता है।
साध्वी अमितप्रज्ञा ने कहा कि साधु-साध्वी के आगमन से पतझड़ में भी मधुमास आ जाता है। साध्वी सौरभप्रज्ञा ने भावना व्यक्त की। प्रारंभ में अखिल भारतीय दिवाकर संगठन समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष पन्नालाल कोठारी ने सजोड़े चातुर्मास की आज्ञा प्रदान की। अखिल भारतीय राष्ट्रीय महिला अध्यक्ष रुचिरा सुराणा ने भी विचार रखे।
राष्ट्रीय युवा उपाध्यक्ष रमेश पुनमिया, प्रांतीय युवा अध्यक्ष किरण गोलेछा, पंकज रांका हैदराबाद, कमलेश बोरदिया मुम्बई, हासन अध्यक्ष वसंत बोहरा, बाणावर अध्यक्ष किशोर बोहरा, तेरापंथ अध्यक्ष उत्तमचंद गन्ना, चिकपेट महामंत्री गौतम धारिवार, हनुमंत नगर से सुरेश धोका ने विचार व्यक्त किए। महिला, बहु व कन्या मंडल ने गीतिका प्रस्तुत की। संघ अध्यक्ष दानमल मेहता ने स्वागत किया। संचालन संघ मंत्री ज्ञानचंद लोढ़ा ने किया। नेमीचंद बाबेल ने धन्यवाद दिया।
कोरमंगला स्थित सिपानी भवन में साध्वी दीपिका जयश्री का प्रवेश
कोरमंगला स्थित सिपानी भवन में साध्वी दीपिका जयश्री आदि ठाणा 5 ने शनिवार को चातुर्मास प्रवेश किया।
साध्वी ने कहा कि धर्म आराधना का सबसे सुंदर अवसर चातुर्मास होता है। चातुर्मास में साधक भगवंतों का सानिध्य प्राप्त होने से अधिक से अधिक व्यक्तियों को जिनवाणी का श्रवण कर धर्म आराधना से जुडऩे का अवसर प्राप्त होता है।
चातुर्मास सिर्फ साधु-साध्वी के लिए नहीं अपितु सभी के लिए होता है। प्रारंभ में साधुमार्गी जैन संघ कोरमंगला के अध्यक्ष राजकुमार सिपानी ने सभी को चातुर्मास में अधिकाधिक जुडऩे का आह्वान किया। धर्मसभा से पहले सुबह 8 बजे प्रकाशचंद बेताला के निवास से साध्वीवृंद ने विहार शुरू कर सिपानी भवन पहुंचे। साथ में श्रावक जयकारे लगाते चल रहे थे।
इस अवसर पर साधुमार्गी संघ बेंगलूरु के अध्यक्ष कमल सिपानी, रिद्धकरण सिपानी, शांति लाल सांड, विमल सिपानी, कुमुद देवी सिपानी, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष उत्तमचंद कोठारी आदि पदाधिकारी व अन्य गणमान्यजन उपस्थित थे। संचालन लालचंद छिंगावत ने किया। चातुर्मासिक प्रवचन 27 जुलाई से शुरू होंगे।