शुल्क में शत-प्रतिशत वृद्धि
बेंगलूरु. राज्य में अब पानी का औद्योगिक उपयोग महंगा हो गया है। राज्य सरकार ने औद्योगिक उपयोग के लिए झीलों, तालाब, नहरों और बांधों से लिए जाने वाले पानी की दर में लगभग शत-प्रतिशत वृद्धि कर दी है। पहले यह 3200 रुपए मिलियन क्यूबिक फीट था जो अब बढ़कर 3 लाख रुपए मिलियन क्यूबिक फीट तक हो गया है।
नदियों आदि प्राकृतिक जल स्त्रोतों से लिए जाने वाली पानी दर 1800 मिलियन क्यूबिक फीट से बढ़कर करीब डेढ़ लाख रुपए प्रति मिलियन क्यूबिक फीट हो गई है। दरों में वृद्धि का आदेश 28 मई को जारी हुआ था। हालांकि, यह गुरुवार को सामने आया। उद्योग जगत शुल्क में भारी वृद्धि के इस आदेश से चिंतित है और सरकार से फैसला वापस लेने की अपील की है।
उद्योग जगत लागत बढऩे से चिंतित, वापस लेने की अपील
बेंगलूरु. कर्नाटक आयरन एंड स्टील मैन्युफैक्चर्स एसोशिएशन (किसमा) हाल में जलापूर्तिदरों में की गई सौ गुना बढ़ोतरी के निर्णय पर पुनिर्विचर करने के लिए राज्य सरकार से अपील का निर्णय किया है। राज्य सरकार ने हाल में उद्योगों को पानी की आपूर्ति दर में बढ़ोतरी कर पिछले जून से इसे लागू करने का निर्णय किया है। इस संबंध में संघ का कहना है कि सरकार का यह निर्णय न केवल ज्यादती है बल्कि इससे राज्य सरकार के बारे में उद्योगों के प्रति मित्रवत नहीं होने का संदेश जाएगा।
इस संबंध में संघ के अध्यक्ष व कल्याणी स्टील के प्रबंधन निदेशक आर.के. गोयल ने कहा कि हम सरकार से सहयोगी की भूमिका निबाने की अपैक्षा करते हैं ताकि उद्योगों का भी विकास हो और हम अधिक संक्या में रोजगार के अवसर सृजित कर सकें। लेकिन हालिया निर्णय से ऐसा प्रतीत होता है कि राज्य सरकार उद्योगों के प्रति मित्रवत नहीं है क्योंकि इस सरकार ने उद्योगों के लिए बुनियादी कच्ची सामग्री के दामों में सौ गुना बढ़ोतरी कर दी है।
किमसा ने एक विज्ञप्ति में कहा कि राज्य में कुल 52,545 उद्योग हैं जो राज्य सरकार के खजाने को योगदान करते हैं। ये उद्योग राज्य को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष तौर पर 21 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं। लेकिन सरकार की हालिया दर वृद्धि से स्टील, ऊर्जा तथा मैन्युफेक्चरिंग उद्योगों पर बुरा असर पड़ा है। यदि सरकार ने मूल्य वृद्धि पर पुनर्विचार नहीं किया तो उद्योगों की लागत प्रभावित होगी और रोजगार पर बुरा असर पड़ेगा।
उन्होंने कहा कि कर्नाटक में औद्योगिक पानी देश में सबसे महंगा हो गया है और राज्य महाराष्ट्र से भी अधिक यानी 10.59 रुपए प्रति घनमीटर दर लगा रहा है जबकि महाराष्ट्र की दर 9.60 रुपए प्रति घनमीटर है।
पड़ोसी राज्य तमिलनाडु केवल 0.50 रुपए प्रति घन मीटर और यहां तक कि पानी के अभाव का सामना करने वाला राजस्थान जैसा राज्य उद्योगों को 0.70 रुपए प्रति घन मीटर से दाम से पानी की आपूर्ति कर रहा है। राज्य के जलाशयों से जहां पहले प्रति मिलियन घन मीटर पानी का दाम 3200 रुपए था वहां अब इसे बढ़ाकर 3 लाख रुपए प्रति मिलीयन घनमीटर कर दिया गया है। बहरहाल, किसमा के सचिव रमण कुमार ने कहा कि हम अगले कुछ दिनों में बढ़ी दरों को वापस लेने के लिए राज्य सरकार से अपील करने की योजना बना रहे हैं।