
मैसूरु. वर्धमान स्थानकवासी श्रावक संघ सिद्धार्थनगर स्थित सीआईटीबी परिसर में श्रुत मुनि ने कहा कि अनुयोग सूत्र में सात स्वरों का उल्लेख 'सा, रे, गा, मा, प, द, नि, साÓ में आता है। स्वर सावधान होने की प्रेरणा देतें हैं। हमारी आत्मा काम, विचार, राग, द्वेष की भावनाओं के दल दल में फंस तो नहीं रही है।
इसका हमें ध्यान रखना चाहिए। मन चंचल है, कहीं मन परिवर्तित न हो जाए। इसका ध्यान रखते हुए त्याग एवं प्रत्याख्यान नियमों के बंधनों बांधते हुए अनावश्यक कर्म एवं पापों के सेवन से बचना चाहिए। सोच समझ कर आचरण करें तो कभी मुंह की नहीं खानी पड़ती है।
पाथरडी से आए पांच सदस्यों ने सामूहिक रूप से अ_ाई के प्रत्याख्यान ग्रहण करते हुए तपस्या रूपी भेंट अर्पित की।
सभा में चेन्नई, अम्बातुर, नंजनगुड, टी नरसीपुर एवं आसपास के क्षेत्रों से दर्शनार्थी उपस्थित थे। अक्षरमुनि ने तपस्वियों के प्रति मंगलभावना प्रस्तुत की। संघ द्वारा तपस्वियों का सम्मान किया गया। शुक्रवार को 'जीवन रेखा निश्चित करोÓ विषय पर होगा। साथ उपाध्याय केवल मुनि की जयंती मनाई जाएगी।
सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र मोक्ष के मार्ग
मैसूरु. स्थानकवासी जैन संघ के तत्वावधान में चातुर्मासार्थ सिटी स्थानक में डॉ. समकित मुनि ने कहा कि सम्यक ज्ञान, दर्शन, चारित्र तीनों मोक्ष के मार्ग हैं। समकित मुनि ने कहा कि दर्शन आत्मा में अनादि काल से है। दिशा चाहे बाहर की ओर हो या जड़ की तरफ, लेकिन दर्शन अवश्य रहता है। साधना का मुख्या आधार सम्यक दर्शन है और इसके बिना पांच महाव्रतों की साधना हो ही नहीं सकती।
सम्यक दर्शन धर्म की जड़ है। श्रद्धा भक्त को भगवान बना देती है। जब जीव में सद्गुण आते हैं तब आत्मा महात्मा बनाने लगती है। प्रारम्भ में जयवंत मुनि ने गीतिका प्रस्तुत की। भवांत मुनि ने बताया कि गुरुवार को 4 .7 .15 उपवास के प्रत्याख्यान हुए। संघ अध्यक्ष कैलाशचंद बोहरा ने स्वागत किया।