उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने राज्य से चर्चा किए बिना अचानक फैसला किया है
बेंगलूरु. कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद मेंजल संसाधन एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि कावेरी जल नियमन समिति के गठन के बारे में मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी ने प्रधानमत्री नरेंद्र मोदी को राज्य की आपत्ति तथा अपेक्षा के बारे में बताया और इस मुद्दे पर व्यापक चर्चा करने की मांग भी की। उन्होंने कहा कि भाजपा इस मसले में हस्तक्षेप कर रही है।
हुब्बली हवाई अड्डे पर उन्होंने कहा कि समिति के गठन को लेकर पड़ोसी राज्य के दबाव बना रहे हैं। हमने नोटिफिकेशन का विरोध किया है। केंद्र सरकार ने राज्य से चर्चा किए बिना अचानक फैसला किया है।
हम फिर चर्चा कर फैसला लेंगे। न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं और इसे मानने पर प्रतिबध्द हैं परन्तु हमारी समस्या और राज्य के हितों पर केंद्र सरकार ने ध्यान नहीं दिया है। यह रुख सही नहीं है। राज्य सरकार के अगले कदम के बारे में शीघ्र ही निर्णय किया जाएगा। केंद्र सरकार हमें समय नहीं देकर पड़ोसी राज्य के दबाव में आगे झूक गई। हमने प्रधानमंत्री तथा केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से आग्रह किया था परंतु हमसे बात भी नहीं की गई। उन्होंने कहा कि राज्य के किसानों के हितों की रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।
फीस बढ़ाने पर किया जा रहा विचार
चिकित्सा शिक्षा मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि राज्य के सरकारी मेडिकलइ कॉलेजों की फीस बढ़ाने पर विचार कर रही है। इसके अलावा सरकारी कॉलेजों में चिकित्सा शिक्षा प्राप्त करने वाले छात्रों को ग्रामीण इलाकों में सेवाएं देना अनिवार्य बनाने का प्रस्ताव भी है।
उन्होंने कहा कि सरकार चिकित्सा के हर छात्र पर करीब 10 लाख रुपए खर्च करती है। जबकि छात्र केवल 16 हजार रुपए सालाना ही अदा करते हैं। सरकारी कॉलेज इसमें से 9 हजार विवि को अदा कर देता है। इसलिए उसके पास अपना फंड बहुत कम रह जाता है। निजी कॉलेजों की तुलना में यह एकदम अतार्किक है।