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आधुनिक चिकित्सा के दौर में होम्योपैथी आज भी प्रासंगिक : राज्यपाल गहलोत

होम्योपैथी को ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने, जनजागरूकता बढ़ाने और सभी के लिए सस्ती व प्रभावी चिकित्सा सुनिश्चित करने की जरूरत है।
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बैंगलोर

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Nikhil Kumar

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Updated: 6 May 2026, 6:13 PM IST

विश्व होम्योपैथी दिवस

राज्यपाल थावरचंद गहलोत होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए।

राज्यपाल थावरचंद गहलोत ने कहा कि भारत India में होम्योपैथी Homeopathy एक प्रभावशाली और लोकप्रिय चिकित्सा पद्धति के रूप में स्थापित हो रही है, जिससे देशभर में लाखों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आयुष मंत्रालय इस प्रणाली को बढ़ावा देने के लिए उल्लेखनीय कार्य कर रहा है। होम्योपैथी को ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों तक पहुंचाने, जनजागरूकता बढ़ाने और सभी के लिए सस्ती व प्रभावी चिकित्सा सुनिश्चित करने की जरूरत है।

वे मंगलवार को होम्योपैथी फाउंडेशन और राजीव गांधी स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरजीयूएचएस) की ओर से विश्व होम्योपैथी दिवस के उपलक्ष्य में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

शरीर, मन और आत्मा एक साथ

राज्यपाल ने कहा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, समर्पित चिकित्सकों और शोध आधारित दृष्टिकोण के कारण होम्योपैथी का तेजी से विस्तार हो रहा है। होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप हर वर्ष 10 अप्रेल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। उनका दृष्टिकोण शरीर, मन और आत्मा को एक साथ ध्यान में रखकर उपचार करने पर आधारित था।राज्यपाल ने कहा कि होम्योपैथी में कम मात्रा में दी जाने वाली दवाएं शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करती हैं और आत्म-चिकित्सा को बढ़ावा देती हैं। आधुनिक चिकित्सा में प्रगति के बावजूद जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, तनाव और दीर्घकालिक बीमारियों की बढ़ती घटनाएं होम्योपैथी की प्रासंगिकता को दर्शाती हैं। सतत स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगमुक्त जीवन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल स्वास्थ्य सेवाएं भी है।

नवाचार आह्वान

उन्होंने होम्योपैथी में अनुसंधान को और मजबूत करने, डिजिटल हेल्थ और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा वैश्विक स्तर पर इसके परिणाम प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया। छात्रों से पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान के साथ जोडकऱ नवाचार करने का आह्वान किया। इस अवसर पर चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर प्रधान सचिव मोहम्मद मोहसिन, आरजीयूएचएस के कुलपति डॉ. बी.सी. भगवान, कर्नाटक होम्योपैथी बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. बी.टी. रुद्रेश, सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।