राज्यपाल ने कहा कि राज्य में गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा शिक्षा, समर्पित चिकित्सकों और शोध आधारित दृष्टिकोण के कारण होम्योपैथी का तेजी से विस्तार हो रहा है। होम्योपैथी के जनक डॉ. सैमुअल हैनिमैन की जयंती के रूप हर वर्ष 10 अप्रेल को विश्व होम्योपैथी दिवस मनाया जाता है। उनका दृष्टिकोण शरीर, मन और आत्मा को एक साथ ध्यान में रखकर उपचार करने पर आधारित था।राज्यपाल ने कहा कि होम्योपैथी में कम मात्रा में दी जाने वाली दवाएं शरीर की प्राकृतिक रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय करती हैं और आत्म-चिकित्सा को बढ़ावा देती हैं। आधुनिक चिकित्सा में प्रगति के बावजूद जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों, तनाव और दीर्घकालिक बीमारियों की बढ़ती घटनाएं होम्योपैथी की प्रासंगिकता को दर्शाती हैं। सतत स्वास्थ्य का अर्थ केवल रोगमुक्त जीवन नहीं, बल्कि दीर्घकालिक, सुलभ और पर्यावरण के अनुकूल स्वास्थ्य सेवाएं भी है।