
कावेरी जल बंटवारा विवाद: सरकार के सामने पहली बड़ी चुनौती
बेंगलूरु. कावेरी नदी के पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे विवाद में केंद्र सरकार के ताजा कदम के बाद पहली बार राज्य की गठबंधन सरकार के सामने बड़ी चुनौती आई है। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने हालांकि कानूनी लड़ाई की बात कही है लेकिन जानकारों का कहना है कि पहले की भांति उसके सामने ज्यादा विकल्प नहीं हैं। वे प्रस्तावित व्यवस्था में तकनीकी समस्याओं के आधार पर ही इसका विरोध किया है। राज्य सरकार की मुख्य आपत्ति यह है कि कावेरी बेसिन के बांधों पर उसका नियंत्रण नहीं रहेगा और समिति के सदस्य ही हर बात तय करेंगे।
कावेरी जल विनियमन समिति कावेरी जलबहाव क्षेत्र के बांधों के जलस्तर की निगरानी कराएगी। बांधों के जलभंडार पर नियंत्रण रखेगी तथा समिति के निर्देशन में जल वितरण किया जाएगा। कर्नाटक की सबसे बड़ी आपत्ति यही है। सुप्रीम कोर्ट ने जनवरी में कावेरी मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का आदेश दिया था। कोर्ट ने तब अपने फैसले में कहा था कि नदी के पानी पर किसी भी राज्य का मालिकाना हक नहीं है।
उधर, बीएस येड्डियूरप्पा ने कहा कि राज्य सरकार ने कावेरी प्रबंधन बोर्ड के लिए राज्य से दो सिंचाइविदों के नाम नहीं भेजे हैं। सरकार अपना दायित्व निभाने में विफल रही और केवल केंद्र सरकार दोषी ठहरा रही है।
नौ सदस्यीय है विनियमन समिति
बेंगलूरु. कावेरी जल प्रबंधन योजना की 1 जून को जारी अधिसूचना के तहत नौ सदस्यीय कावेरी जल विनियमन समिति का गठन किया गया है। केन्द्र सरकार द्वारा गठित इस समिति का अध्यक्ष केन्द्रीय जल आयोग के मुख्य अभियंता नवीन कुमार को बनाया गया है। इसके अतिरिक्त कर्नाटक सरकार के जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता, केरल सरकार के आइएसडब्ल्यू मुख्य अभियंता केए जोशी, पुदुचेरी सरकार के पीडब्ल्यूडी के मुख्य अभियंता वी. षणमुगसुंंदरम, तमिलनाडु सरकार के तिरुचिरापल्ली क्षेत्र के डब्ल्यूआरडी मुख्य अभियंता आर सेंथिल कुमार, आइएमडी के वैज्ञानिक (सर्विस) डॉ. एम मोहपात्रा, कोयम्बटूर सीडब्ल्यूसी के मुख्य अभियंता एनएम कृष्णमुणि, बागवानी विभाग के आयुक्त (एमओए एंड एफलडब्ल्यू) और सीडब्ल्यूसी के वाइबीओ मुख्य अभियंता एएस गोयल को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है।
चूंकि कर्नाटक सरकार ने समिति सदस्य के रूप में अपने प्रतिनिधि का नाम अब तक नामित नहीं किया है, इसलिए केन्द्र सरकार ने कर्नाटक सरकार के जल संसाधन विभाग के मुख्य अभियंता को इसका सदस्य माना है। समिति का मुख्यालय बेंगलूरु होगा। पहली बैठक जुलाई में दिल्ली में होन की संभावना बताई गई है।

Published on:
24 Jun 2018 04:32 pm
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