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आंदोलन से मुश्किल में परिवहन निगम

निगम को नौ दिन में तीन बार अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ीं जिससे निगम को 3 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है

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बेंगलूरु. कावेरी नदी जल बंटवारे पर तमिलनाडु में हो रहे विरोध प्रदर्शनों के कारण कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (केएसआरटीसी) को इसका खामियाजा भुगगता पड़ रहा है। निगम को नौ दिन में तीन बार अपनी सेवाएं बंद करनी पड़ीं जिससे निगम को 3 करोड़ से अधिक का नुकसान हुआ है। केएआरटीसी के प्रबंधनिदेशक एसआर उमाशंकर ने बताया कि तमिलनाडु जाने वाली बसें बुधवार को भी बंद रहीं जिस कारण निगम को 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। निगम को अब तक 3, 6और 11 अप्रेल को सेवाएं बंद करनी पड़ी हैं। उमाशंकर ने बताया कि 3 अप्रेल को 1.90 करोड़, 6 अप्रेल को 2.64 लाख और 11 अप्रेल को 19.44 लाख रुपए सहित कुल 3.73 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हो चुका है।

शाम 4 बजे बहाल हुई सेवाएं
हड़ताल के कारण प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से तमिलनाडु जाने वाली बसें 3.30 बजे तक बंद रहीं। यात्रियों के अनुरोध पर रामनगर, मैसूरु और मंड्या व कुछ अन्य संभागों से केवल सीमवर्ती क्षेत्र तक ही कुछ बसों का परिचालन किया गया। बाद में बंद शांतिपूर्वक होने पर 3.30 बजे पुलिस ने सीमा पर खड़ी कुछ बसों को तमिलनाडु जाने की अनुमति दी। निगम की सेवाएं 4.15 बजे सामान्य हो गईं।

किसी दल के पास समाधान नहीं
बेलगावी. काफी लंबे समय से जार कावेरी जल बंटवारे का समाधान किसी भी राजनीतिक दल से असंभव है। केंद्र सरकार वास्तव में इस समस्या का समाधान करना चाहती है तो उसे विशेषज्ञों से संवाद कर इस समस्या का स्थायी समाधान ढूंढना होगा। किसी भी राजनीतिक दल ने आज तक इस समस्या के समाधान के तार्किक प्रयास नहीं किए। अभिनेता प्रकाश राज ने यह बात कही। उन्होंने यहां बुधवार को जिला पत्रकार संघ की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में कहा कि कावेरी मामले को एक राजनीतिक अस्त्र की तरह उपयोग करते हुए सभी राजनीतिक दल इस मामले के सहारे राजनीतिक रोटियां सेक रहें हैं। इस मामले का राजनीतिकरण समस्या की वास्तविक जड़ है। लिहाजा इसके समाधान के लिए हमें राजनेताओं को दूर रखना होगा। उन्होंने कहा कि वे राज्य के मतदाताओं को भाजपा का समर्थन नहीं करने की अपील इसलिए कर रहे हैं क्योंकि भाजपा कैंसर है, जबकि कांग्रेस तथा जद (ध) खांसी या बुखार की तरह होने से भाजपा की तुलना में कम घातक हैं। उन्होंने कहा कि उनकी किसी राजनीतिक दल में शामिल होने की इच्छा नहीं है।