
बेंगलूरु. सत्तारूढ़ गठबंधन के दोनों घटकों- जद (ध) और कांग्रेस के बीच विभागों के बंटवारे को लेकर नौ दिन से चल रहा गतिरोध गुरुवार को खत्म हो गया है। दोनों दलों के बीच कई दौर की बातचीत के बाद विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति बन गई। हालांकि, अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। विश्वस्त सूत्रों के मुताबिक वित्त विभाग जद (ध) के पास रहेगा, जबकि गृह विभाग (खुफिया और कार्मिक को छोड़कर) कांग्रेस के कोटे में रहेगा। वित्त विभाग को लेकर ही दोनों दलों के बीच खींचतान की स्थिति बनी हुई थी। जद (ध) इस विभाग को अपने पास रखने पर अड़ा था, जबकि कांग्रेस इस विभाग पर दावा छोडऩे को तैयार नहीं थी। इसी खींचतान के कारण मंत्रिमंडल के विस्तार में देरी हो रही थी। जानकार सूत्रों का कहना है कि दोनों दलों में सहमति बन जाने के बाद अब शनिवार को मंत्रिमंडल का विस्तार हो सकता है। मंत्रिमंडल में अभी दो ही सदस्य हैं। २३ मई को मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी के अलावा उपमुख्यमंत्री डॉ जी परमेश्वर ने ही शपथ ली थी। दोनों दलों के बीच विभागों को लेकर सहमति बन जाने के बाद वेणुगोपाल और दानिश अली दोपहर में दिल्ली से बेंगलूरु रवाना हो गए। दोनों बेंगलूरु पहुंचने के बाद अपनी-अपनी पार्टी के नेताओं से विचार-विमर्श कर रहे हैं। अली ने कहा कि वे मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एच डी देवेगौड़ा से मुलाकात कर इस मसले पर चर्चा करेंगे। अली ने इस बात की पुष्टि की कि वित्त विभाग जद (ध) के पास ही रहेगा।
दो दिन में हुई पांच बैठकें
मंत्रिमंडल विस्तार में देरी के कारण बढ़ते राजनीतिक दबाव के बीच मामले को सुलझाने के लिए दोनों दलों के नेताओं ने दिल्ली मेें दो दिनों के दौरान पांच बार बैठकें की। बुधवार और गुरुवार को जद (ध) के कुंवर दानिश अली और कांग्रेस के अहमद पटेल, अशोक गहलोत , के सी वेणुगोपाल आदि कई बार कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद के बाद पर मिले और चर्चाएं कीं। दोनों दलों के नेताओं का कहना है कि विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति बन चुकी है, लेकिन औपचारिक घोषणा के लिए दोनों दल आलाकमान से हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं।
राहुल के दखल से सुलझा मामला
सूत्रों के मुताबिक दोनों दलों के बीच विभागों के बंटवारे का मसला कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के दखल के बाद सुलझा। अपनी मां सोनिया गांधी के साथ अमरीका प्रवास पर गए राहुल ने फोन पर पार्टी नेताओं से कई बार बातचीत की, जिसके बाद दोनों दलों में सहमति बन पाई। पिछले शनिवार को प्रदेश कांग्रेस नेताओं के साथ बैठक में विभागों के बंटवारे पर स्थिति साफ नहीं होने के कारण राहुल ने मंत्रियों के नाम को मंजूरी नहीं दी थी। रविवार को राहुल मां की वार्षिक चिकित्सकीय जांच के लिए अमरीका चले गए और आजाद व बाकी नेताओं को जद (ध) से इस मसले पर बातचीत के अधिकृत कर दिया था। सोमवार को दिल्ली प्रवास पर गए कुमारस्वामी ने भी आजाद से मुलाकात की थी और उसके बाद ही यह साफ हो गया था कि वित्त विभाग जद (ध) के पास रहेगा और इसके बदले कांग्रेस को गृह सहित कुछ अन्य विभाग मिल सकते हैं।
विभागों का बंटवारा ...
सूत्रों के मुताबिक जद (ध) को वित्त देने के बदले कांग्रेस को गृह, भारी उद्योग, ऊर्जा, आईटी-बीटी, पर्यटन और शिक्षा मिलेगा, जबकि जद (ध) के पास लोकनिर्माण, सहकारिता और राजस्व रहेगा।
... कांग्रेस ने इस कारण छोड़ा दावा
जानकार सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस ने अगले लोकसभा चुनाप से पहले विपक्षी एकजुटता को मजबूत बनाने के लिए वित्त विभाग पर अपना दावा छोडऩे का फैसला किया। पार्टी सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस आलाकमान चाहता था कि राज्य में जल्द से जल्द सरकार कामकाज शुरु करे ताकि विपक्ष को हमला करने और गठबंधन पर सवाल उठाने का मौका नहीं मिले लेकिन विभागों के बंटवारे को लेकर सहमति नहीं बन पाने के कारण मंत्रिमंडल का विस्तार नहीं हो पा रहा था। पार्टी सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी शुरु से ही वित्त विभाग मांग के अनुरुप कांग्रेस को दिए जाने के पक्ष में थे लेकिन प्रदेश नेता इसके खिलाफ थे। वे चाहते थे कि मुख्यमंत्री पद के बदले उन्हें वित्त विभाग मिले लेकिन जद ध इसके लिए राजी नहीं हुआ। जद ध के अडिय़ल रूख को देखते हुए राहुल ने पार्टी नेताओं से वित्त विभाग का मोह छोड़कर आगे बढऩे के लिए कहा ताकि राष्ट्र्रीय स्तर पर नुकसान ना हो। राहुल की राय थी कि विपक्षी एकता को मजबूत बनाने के लिए कांग्रेस को एक कदम आगे बढ़कर सहयोगी दलों के साथ दिखना चाहिए।
विस्तार पर अभी फैसला नहीं : कुमारस्वामी
दोनों दलों के बीच विभागों के बंटवारे पर सहमति बन जाने की खबरों की बीच मुख्यमंत्री एच डी कुमारस्वामी ने गुरुवार को कहा कि अभी दो सदस्यीय मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर कोई निर्णय नहीं हुआ है। शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक के बाद विधानसौधा परिसर में कुमारस्वामी ने कहा कि दोनों दलों के नेताओं की बैठक में जल्द ही इसके बारे में निर्णय किया जाएगा। कुमारस्वामी ने कहा कि विभागों के बंटवारे तथा मंत्रिमंडल के विस्तार को लेकर उत्पन्न गतिरोध शुक्रवार को समाप्त हो जाएगा और जल्द ही मंत्रिमंडल का विस्तार कर दिया जाएगा। कुमारस्वामी ने संकेत दिया कि दोनों ही दलों के नेता शुक्रवार को संयुक्त प्रेस वार्ता करके विभागों के के बंटवारे की रूपरेखा की घोषणा कर सकते हैं। कुमारस्वामी ने यह भी कहा कि जब भी कोई नई गंठबंधन की सरकार सत्ता संभालती है तो इस तरह का विलंब होना आम बात है।
होटल में हुई बैठक
वेणुगोपाल के बेंगलूरु पहुंचने के बाद दोनों दलों के नेताओं की रेसकोर्स रोड स्थित पांच सितारा होटल में बैठक हुई। बैठक में दोनों दलों के नेताओं ने विभागों के बंटवारे, संभावित मंत्रियों के नामों और उन्हें आवंटित किए जाने वाले विभागों पर चर्चा की। बैठक में मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने भी भाग लिया। दोनों पार्टियों के नेताओं ने कहा कि बैठक में कोई अंतिम निर्णय नहीं हो पाया और शुक्रवार को एक बार फिर बैठक होगी। शुक्रवार को होने वाली बैठक के बाद कांग्रेस नेता दिल्ली वापस जाएंगे। दिल्ली में कांग्रेस आलाकमान से पार्टी की ओर से मंत्री बनाए जाने वाले नेताओं और उन्हें आवंटित किए जाने वाले विभागों पर चर्चा के बाद ही अंतिम घोषणा होगी। जद ध सूत्रों का कहना है कि उनकी ओर बनाए जाने वाले ११ मंत्रियों के नामों पर कोई संशय नहीं है। आलाकमान ने नामों को मंजूरी दे दी है। बसपा की मांग पर अभी विचार होना है।
बसपा ने भी मांगा पद
गठबंधन सरकार की सहयोगी सबसे छोटी पार्टी बसपा ने भी अपने एकमात्र विधायक को मंत्री बनाए जाने की मांग की है। बसपा का चुनाव पूर्व जद ध के साथ गठजोड़ था। बसपा ने १८ उम्मीदवार उतारे थे लेकिन सिर्फ चामराजनगर जिले की कोल्लेगल से ही पार्टी के उम्मीदवार एन महेश जीत पाए। बसपा प्रमुख मायावती ने पहली बार जीते अपनी पार्टी के विधायक महेश को कुमारस्वामी मंत्रिमंडल में समाज कल्याण मंत्री बनाए जाने की मांग की है। बताया जाता है कि देवेगौड़ा से फोन पर बात करने के साथ ही मायावती ने कुमारस्वामी को इस बारे में पत्र भी लिखा है।