नूतन वर्ष के मंगल प्रभाव को वीर संवत् 2555 की शुरुआत हुई।
मैसूरु. महावीर जिनालय सिद्धलिंगपुरा में गुरुवार को धर्मसभा में जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि कार्तिक कृष्ण अमावस्या रात्रि के अंतिम मुहूर्त में भगवान महावीर स्वामी ने कर्मों का क्षय करके शाश्वत-मोक्षपद को प्राप्त किया, जो निर्वाण कल्याणक के रूप में जाना जाता है।
परमात्मा के निर्वाण से शुरू हुए वीर संवत के 2544 वर्ष पूर्ण हुए। नूतन वर्ष के मंगल प्रभाव को वीर संवत् 2555 की शुरुआत हुई।
उन्होंने कहा कि भगवान महावीर अपने प्रथम शिष्य गौतम स्वामी के मन में रहे गुरु के प्रति स्नेह राग को तोडऩे के लिए, अपने निर्वाण के पहले ही उन्हें देवशर्मा ब्राह्मण को प्रतिबोध करने भेज देते हैं।
वापस लौटते जब देवताओं के मुख से प्रभु निर्वाण के वृतांत को सुनते हैं, तब एक बालक की भांति उनके वियोग में वीर-वीर करते हुए विलाप करते हैं।
प्रभुु के प्रति अपने मन में रहे एकपक्षीय स्नेह राग के ठोस होने पर एकत्व और अन्यत्व भावनाओं से अनादि काल के कर्मों को क्षय करके केवलज्ञान की प्राप्ति करते हैं।