अंतिम दर्शन के दौरान एक बंदर Monkey उनके घर पहुंचा और सीधे उनके पार्थिव शरीर के पास जाकर बैठ गया। बंदर ने उनका सिर छूते हुए मानो उन्हें गले लगाया और कुछ देर तक वहीं चुपचाप बैठा रहा, जैसे अपने दुख को व्यक्त कर रहा हो।
प्यार Love शब्दों और प्रजातियों से परे होता है। जानवर Animal भी इंसानों की तरह भावनाएं समझते हैं और सच्चे स्नेह को कभी नहीं भूलते। ऐसा ही एक मार्मिक दृश्य बेंगलूरु Bengaluru दक्षिण जिले के चन्नपट्टण के रायरा दोड्डी गांव में देखने को मिला, जहां इंसान और जानवर के बीच गहरे भावनात्मक जुड़ाव की मिसाल सामने आई।
85 वर्षीय पार्वतम्मा Parvatamma का सोमवार को उम्र संबंधी बीमारी के कारण निधन हो गया। अंतिम दर्शन के दौरान एक बंदर Monkey उनके घर पहुंचा और सीधे उनके पार्थिव शरीर के पास जाकर बैठ गया। बंदर ने उनका सिर छूते हुए मानो उन्हें गले लगाया और कुछ देर तक वहीं चुपचाप बैठा रहा, जैसे अपने दुख को व्यक्त कर रहा हो।
स्थानीय लोगों के अनुसार, पार्वतम्मा कई वर्षों से घर के आसपास आने वाले बंदरों को नियमित रूप से खाना खिलाती थीं। जहां अन्य लोग बंदरों को परेशानी मानते थे, वहीं उन्होंने उन्हें अपनापन और स्नेह दिया। यही स्नेह उनके अंतिम समय में भी दिखाई दिया, जब एक बंदर ने आकर अपनी अंतिम विदाई दी।
यह पहला मामला नहीं है जब इंसान और जानवर के बीच का रिश्ता मौत के बाद भी कायम रहा हो। इससे पहले 2023 में केरल के कन्नूर में एक वफादार कुत्ते Dog ने अपने मालिक की मौत के बाद ऐसी ही मिसाल पेश की थी। ‘केरल का हाचिको’ कहे जाने वाले इस कुत्ते ने अपने मालिक के निधन के बाद जिला अस्पताल के मुर्दाघर के बाहर चार महीने तक इंतजार किया।
जिला अस्पताल के कर्मचारी विकास कुमार ने उस समय बताया था, मरीज की मौत हो गई और कुत्ते ने अपने मालिक को मुर्दाघर ले जाते देखा। उसे लगता है कि उसका मालिक अभी भी यहीं है। यही वजह है कि वह पिछले चार महीनों से यहां से नहीं गया। इस घटना ने भी लोगों को भावुक कर दिया था और यह दिखाया था कि जानवरों में भी गहरी संवेदनाएं और अटूट वफादारी होती है।