1 अप्रैल 2026,

बुधवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

घर-घर पहुंचेगी डायबिटिक फुट स्क्रीनिंग वैन

भारत में हर 12 सेकंड में एक नया डायबिटिक फुट अल्सर का मामला सामने आता है, जबकि हर साल लाखों लोगों को अंग गंवाना पड़ता है। इनमें से अधिकांश मामलों को समय पर इलाज से रोका जा सकता है।

2 min read
Google source verification
डायबिटिक फुट केयर

शुरुआती जांच के जरिए मधुमेह के मरीजों के पैरों में दबाव वाले बिंदुओं (प्रेशर पॉइंट्स) की पहचान की जा सकती है, जिससे दबाव कम कर पैरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

-कलबुर्गी से शुरू हुआ पोडियाट्री मिशन

चिकित्सा शिक्षा मंत्री डॉ. शरण प्रकाश पाटिल ने कहा कि कर्नाटक Karnataka के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पतालों में डायबिटिक फुट केयर Diabetic Foot Care (मधुमेह से जुड़े पैरों की देखभाल) को लेकर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। आने वाले दिनों में डायबिटिक फुट से संबंधित समस्याओं की स्क्रीनिंग की भी व्यवस्था की जा रही है।

वे सोमवार को गुलबर्गा इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (जीआइएमएस) में पोडियाट्री रीच अक्रॉस इंडिया फॉर अवेयरनेस एंड स्क्रीनिंग नामक राष्ट्रीय सहयोगात्मक पहल का औपचारिक उद्घाटन कर संबोधित कर रहे थे। यह पहल डायबिटिक फुट की रोकथाम और देखभाल पर केंद्रित है। उन्होंने बताया कि बेंगलूरु Bengaluru स्थित एंडोक्राइनोलॉजी संस्थान प्रभावी ढंग से कार्य कर रहा है, और इसी तरह के केंद्र कलबुर्गी और मैसूरु Mysuru में भी स्थापित किए जा रहे हैं।

जांच और जागरूकता

मंत्री ने इस मौके पर एक विशेष डिजिटल पोडियाट्री स्क्रीनिंग वैन को भी हरी झंडी दिखाई। इसका उद्देश्य जागरूकता बढ़ाना, समय रहते जांच करना और उचित इलाज सुनिश्चित कर अंग कटने (अम्प्यूटेशन) के मामलों को रोकना है। इसके तहत देश के विभिन्न शहरों में डिजिटल पोडियाट्री केंद्रों के माध्यम से जांच की जाएगी। वैन देशभर में जाकर लोगों की जांच और जागरूकता का काम करेगी। आधुनिक तकनीक की भूमिका पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि शुरुआती जांच के जरिए मधुमेह Diabetes के मरीजों के पैरों में दबाव वाले बिंदुओं (प्रेशर पॉइंट्स) की पहचान की जा सकती है, जिससे दबाव कम कर पैरों को सुरक्षित रखा जा सकता है।

हर साल लाखों लोगों को अंग गंवाना पड़ता है

डायबिटिक फुट विशेषज्ञ डॉ. संजय शर्मा और डॉ. पवन बेलेहल्ली इस पहल का नेतृत्व कर रहे हैं। इनके अनुसार भारत में हर 12 सेकंड में एक नया डायबिटिक फुट अल्सर का मामला सामने आता है, जबकि हर साल लाखों लोगों को अंग गंवाना पड़ता है। इनमें से अधिकांश मामलों को समय पर इलाज से रोका जा सकता है।