बैंगलोर

धन से कभी मन नहीं भरता

प्रवचन के बाद आराधकों का सम्मान किया गया। संघ के नरेन्द्र गुरु ने भक्ति संगीत प्रस्तुत किया।
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धन से कभी मन नहीं भरता

मैसूरु. महावीर जिनालय सिद्धलिंगपुरा में भगवान महावीर स्वामी के निर्वाण कल्याणक के अवसर पर संगीतमय वीर वंदनावली का कार्यक्रम हुआ।

धर्मसभा में प्रवचन देते हुए जैनाचार्य विजय रत्नसेन सूरीश्वर ने कहा कि हर व्यक्ति के जीवन में स्वयं के जन्मदिन का खूब महत्व होता है, परंतु सच मायने में जन्म तो उसी का सफल है, जो इस जन्म पाकर अपने जन्म, जरा और मृत्यु के बंधनों को हमेशा के लिए तोड़ दे।

प्रवचन के बाद आराधकों का सम्मान किया गया। संघ के नरेन्द्र गुरु ने भक्ति संगीत प्रस्तुत किया।

इससे पूर्व मंगलवार को जैनाचार्य ने धर्मसभा में कहा कि जिस प्रकार जल के संचय से सागर कभी तृप्त नहीं होता है, ईंधन को जलाने से अग्नि कभी तृप्त नहीं होती है, मुर्दों को जलाते हुए श्मशान कभी तृप्त नहीं होता है उसी प्रकार धन की प्राप्ति से सदैव अतृप्त मानवीय मन कभी तृप्त नहीं होता हे।

लोभ, कषाय की यह विचित्रता है कि जैसे धन मिलता जाता है, वैसे ही अधिक धन प्राप्ति का लोभ भी बढ़ता है।

उस लोभ की पूर्ति करने के लिए व्यक्ति जीवन भर मेहनत करकेे धन का संग्रह करता है, परंतु संग्रह किया हुआ धन वह स्वयं अपने जीवन पर भी उपभोग नहीं कर सकता है।

उन्होंने कहा कि जीवन के किसी भी क्षेत्र में किया गया प्रमाद नुकसान का ही कारण बनता है। परंतु उससे होने वाला नुकसान नगण्य है, लेकिन आत्मविश्वास के मार्ग में प्रमाद के वशीभूत होने से नुकसान बहुत है।

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