बैंगलोर

जल शुल्क बढ़ोतरी के खिलाफ निजी स्कूलों का विरोध, सरकार को सौंपा ज्ञापन

ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जल बोर्ड ने शैक्षणिक संस्थानों को वाणिज्यिक श्रेणी में रखकर अत्यधिक शुल्क वसूली शुरू कर दी है, जिससे स्कूलों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

2 min read
Mar 29, 2026

-शैक्षणिक संस्थानों को वाणिज्यिक श्रेणी से हटाने की मांग

शहर में जल आपूर्ति Water Supply व्यवस्था को लेकर नया विवाद सामने आया है। राज्य के निजी स्कूलों के संगठन एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकंडरी स्कूल्स इन कर्नाटक ने बेंगलूरु जल आपूर्ति और सीवरेज बोर्ड (बीडब्ल्यूएसएसबी) की ओर से बढ़ाए गए शुल्क और वर्गीकरण प्रणाली का विरोध करते हुए उपमुख्यमंत्री डी. के. शिवकुमार को विस्तृत ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया है कि जल बोर्ड ने शैक्षणिक संस्थानों को वाणिज्यिक श्रेणी में रखकर अत्यधिक शुल्क वसूली शुरू कर दी है, जिससे स्कूलों पर अनावश्यक आर्थिक बोझ बढ़ रहा है।

ये भी पढ़ें

 तीसरी भाषा के महत्व पर पुनर्विचार करे सरकार

बिलिंग प्रक्रिया में कई छिपे और अस्पष्ट शुल्क शामिल

संगठन के महासचिव डी. शशिकुमार ने कहा, निजी स्कूलों और प्रशिक्षण संस्थानों से लगभग 2,500 रुपए प्रति माह तथा सीबीएसइ/आइसीएसइ स्कूलों से 5,000 रुपए प्रति माह तक शुल्क लिया जा रहा है। इसे अनुचित और भेदभावपूर्ण बताते हुए कहा गया है कि सभी स्कूलों को एक समान श्रेणी में रखा जाना चाहिए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि बिलिंग प्रक्रिया में कई छिपे और अस्पष्ट शुल्क शामिल किए जा रहे हैं, जैसे सीवरेज शुल्क, ग्रेटर बेंगलूरु शुल्क, उपयोग आधारित अतिरिक्त शुल्क और विभिन्न प्रकार के जुर्माने। इन अतिरिक्त शुल्कों के कारण कुल बिल में भारी वृद्धि हो रही है।

अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढऩे की आशंका

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि अधिकांश निजी स्कूल मध्यम और निम्न आय वर्ग के छात्रों को शिक्षा प्रदान करते हैं, जहां वार्षिक फीस अपेक्षाकृत कम होती है। ऐसे में बढ़े हुए जल शुल्क का सीधा असर स्कूल फीस पर पड़ रहा है, जिससे अभिभावकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढऩे की आशंका है। संगठन ने सरकार से मांग की है कि शैक्षणिक संस्थानों को वाणिज्यिक श्रेणी से हटाया जाए, शिक्षा संस्थान के लिए अलग शुल्क श्रेणी बनाई जाए, स्कूलों के बीच भेदभाव समाप्त किया जाए तथा पारदर्शी और स्पष्ट बिलिंग प्रणाली लागू की जाए।

Updated on:
29 Mar 2026 04:50 pm
Published on:
29 Mar 2026 04:49 pm
Also Read
View All

अगली खबर