
बेंगलूरु. बेंगलूरु जलापूर्ति एवं सीवरेज बोर्ड (बीडब्ल्यूएसएसबी) के तमाम प्रयासों के बावजूद शहर के बड़े आवासीय व वाणिज्यिक भवनों के मालिका वर्षा जल संरक्षण को लेकर उदासीन बने हुए हैं। हालांकि, वर्षा जल संरक्षण के लिए पर्याप्त इंतजाम नहीं करने के कारण बीडब्ल्यूएसएसबी ऐसे भवनों से भारी जुर्माना वसूलता है लेकिन इसके बावजूद मकान मालिक वर्षा जल संरक्षण के लिए कदम नहीं उठा रहे हैं।
बीडब्लूएसएसबी ने 1200 वर्ग फीट या उससे अधिक साइट क्षेत्र वाली कुल 1,77,702 संपत्तियों की पहचान की थी जिन्हें अनिवार्य रूप से आरडब्लूएच स्थापित करना था लेकिन सिर्फ 97,6 27 भवनों में आरडब्लूएच स्थापित हुए। शेष 8 0,075 संरचनाओं के मालिकों ने इसे स्थापित करने में अनिच्छुक हैं।
बोर्ड ने ऐसे लोगों पर अब तक लगभग 28 करोड़ रुपए का जुर्माना लगाया है और सिर्फ जुलाई महीने में 2.74 करोड़ रुपए जुर्माना लगाया गया। विशेषज्ञों का कहना है कि सबसे पहले सरकार को अपनी सभी इमारतों और सार्वजनिक स्थानों पर आरडब्लूएच की स्थापना करनी चाहिए ताकि आम नागरिक भी इसके लिए प्रोत्साहित हों। साथ ही उल्लंघनकर्ताओं पर भारी जुर्माना लगाया जाना चाहिए। मौजूदा जुर्माना राशि बेहद कम या एक महीने के जल शुल्क के बराबर है। इस जुर्माने को कई गुणा बढ़ाना चाहिए।
अधिकारियों का कहना है कि वर्षा जल संरक्षण के लिए इंतजाम नहीं करने वाले वाणिज्यिक भवने से पहले छह महीने के दौरान जुर्माने तौर पर संबंधित महीने के पानी बिल की 50 फीसदी राशि वसूली जाती है। छह महीने इस अवधि के बाद भी अगर वाणिज्यिक भवन मेें वर्षा जल संरक्षण के लिए इंतजाम नहीं किए जाते हैं तो जुर्माने की राशि बढ़कर संबंधित महीने के बिल की दुगुनी हो जाती है।
आवासीय भवनों के मामले में पहले छह महीने के दौरान वर्षा जल संरक्षण का इंतजाम नहीं होने पर बिल का 25 फीसदी राशि जुर्माना के तौर पर देना पड़ता और छह महीने बाद भी नियमों का पालन नहीं किए जाने पर बिल की 50 फीसदी राशि का भुगतान जुर्माना के तौर पर करना पड़ता है। अधिकारियों का कहना है कि अगर सही तरीके से वर्षा जल का संरक्षण किया जाए तो शहर में काफी हद तक पानी की समस्या से निजात पाया जाता है। शहर के बाहरी इलाकों में अब भी नियमित तौर पर पेयजल की आपूर्ति नहीं होती है। बीडब्ल्यूएसएसबी के अधिकारी अब अगल-अलग इलाकों में बढ़ईयों को प्रशिक्षित करने कर ताकि वे नए मकान बनाने वालों को वर्षा जल संरक्षण के इंतजाम के कह सकें।