
बेंगलूरु. राम सेवा समिति एवं सीरवी समाज की ओर से सुंकदकट्टे आई माता मंदिर में आयोजित श्रीराम कथा महोत्सव में राम वनवास प्रसंग का मार्मिक वर्णन सुन भक्त भावविभोर हो उठे। पंडित पवन ने सुंदर केवट प्रसंग की बहुत सुंदर प्रस्तुति दी। कथा में राम भरत मिलाप का वर्णन किया, जिसमें भरत सत्ता छोड़कर सत्य की शरण में गए। राम की चरण पादुका ली और 14 वर्ष मंत्री बनकर काम किया। उन्होंने कहा कि सुख का अतिरेक दु:ख को आमंत्रित करता है।
आचार्य रामचंद्र की उपस्थिति
से दूर हो जाते थे विरोधाभास
बेंगलूरु. सीमंधर शांति सूरी जैन संघ वीवीपुरम के तत्वावधान में आचार्य चंद्रभूषण सूरी की निश्रा में आचार्य विजय रामचंद्र सूरीश्वर की 29वीं स्वर्गारोहण तिथि के उपलक्ष्य में तीन दिवसीय समाधि स्मृति पर्व का आयोजन किया गया। पहले दिन संघ पदाधिकारियों ने गुरु मूर्ति को पुष्प अर्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन किया। संगीत मंडल ने गुरु गुण गीत की प्रस्तुति दी। ट्रस्टी मीठालाल ने गुरु के जीवन पर प्रकाश डाला। आचार्य ने कहा कि रामचंद्र सूरी की उपस्थिति मात्र से विरोधी तत्त्व, विरोधाभास शांत हो जाते थे। उनकी प्रतिभा ही ऐसी थी कि शासन विधा तक, संस्कृति विनाशक एवं संस्कार विभाजक तत्त्वों का विसर्जन हो जाता था। प्रवचन के बाद सामूहिक आयंबिल का आयोजन हुआ।
जहर के समान होता है क्रोधी मनुष्य
बेंगलूरु. राजाजीनगर में साध्वी संयमलता ने कहा कि महापुरुषों ने ब्रह्मचर्य को जीवन और अब्रह्मचर्य को मृत्यु कहा है। ब्रह्मचर्य अमृत है और अब्रह्मचर्य जहर के समान है। उन्होंने कहा कि फैशन के युग में, भोग में, कलियुग में ब्रह्मचर्य का पालन होना कठिन है। विषय वासना पर ब्रेक लगाना कठिन है। साध्वी सौरभप्रज्ञा ने कहा कि क्रोध विष है, रोग है, मनोविकार है। क्रोध जब भी आता है विवेक को नष्ट करके आता है। क्रोधी मनुष्य जहरीला होता है। जो क्रोध का गुलाम है उसका महीनों का तप और लाखों का दान व्यर्थ है। क्रोध पर विजय प्राप्त करना सबसे बड़ी विजय है। साध्वी कमलप्रज्ञा ने भगवान पाŸवनाथ मां पदमावती एकासन की विधि संपन्न करवाई। इसमें 300 से ज्यादा भाई बहनों ने भाग लिया।