पहले श्रीरामुलू ने किया समर्थन फिर पलटे
बेंगलूरु. भाजपा के रूख के खिलाफ पूर्व मंत्री बी श्रीरामुलू ने उत्तर कर्नाटक के साथ अन्याय की बात कहते हुए अलग राज्य की मांग का समर्थन कर दिया। श्रीरामुलू ने कहा कि वे अलग राज्य के लिए आंदोलन का नेतृत्व करने को तैयार हैं। श्रीरामुलू ने कहा कि वे कुछ संगठनों की ओर से इस मांग को लेकर 2 अगस्त को आहूत उत्तर कर्नाटक बंद का समर्थन करेंगे।
मोलकालमुरु के विधायक ने बल्लारी में कहा कि सरकार समय रहते जाग जाए और जैसे आंध्र प्रदेश विभाजन हुआ, उस तरह कर्नाटक का विभाजन नहीं होना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री कुमारस्वामी पर चंद जिलों को ही संरक्षण देने का आरोप लगाया। कुमारस्वामी ने योजनाएं लागू करने व अनुदान आवंटित करने में अन्याय जारी रखा तो वे विधायक पद से इस्तीफा देकर उत्तर कर्नाटक पृथक राज्य के आंदोलन का नेतृत्व करने पर विवश हो जाएंगे।
यह पूछे जाने पर कि क्या वे राज्य के बंटवारे के हिमायती हैं तो उन्होंने कहा कि अखंड कर्नाटक ही उनकी आकांक्षा है पर उत्तर कर्नाटक के साथ अन्याय होने पर वे चुप नहीं बैठ सकते। उन्होंने उत्तर कर्नाटक के लिए अतिरिक्त अनुदान जारी करने की मांग की। श्रीरामुलू ने कहा कि उत्तर कर्नाटक की उपेक्षा जारी रही तो वे लोग चुप नहीं बैठेंगे। वे इस क्षेत्र के विधायकों के साथ भी इस मसले पर बात कर रहे हैं। अगर सरकार का रूख नहीं बदला तो यह भी तेलंगाना आंदोलन की तरह क्रांति में बदल जाएगा। हालांकि, बाद में श्रीरामुलू ने इस मांग के लिए माफी मांग ली थी और स्पष्ट कहा था कि वे इस मांग का समर्थन नहीं करते हैं।
हालांकि, कुछ ही घंटे बाद श्रीरामुलू के सुर बदल गए। पार्टी की फटकार के बाद श्रीरामुलू एक बार फिर अपने बयान से पलट गए। बाद में श्रीरामुलू ने कहा कि उन्होंने कभी अलग उत्तर कर्नाटक की मांग का समर्थन नहीं किया। उनके कहने का मतलब था कि सौतेले व्यवहार के कारण अलग उत्तर कर्नाटक की मांग उठ रही है। यह पहला मौका नहीं जब श्रीरामुलू ने पार्टी के रूख के खिलाफ जाकर अलग उत्तर कर्नाटक की मांग को समर्थन किया है। इससे पहले 10 जुलाई को भी विधानसभा में श्रीरामुलू ने कहा था कि इस बजट को देखकर हमें लगता है कि अलग उत्तर कर्नाटक की मांग का समर्थन करना चाहिए।
अलग राज्य से हल नहीं होगी समस्याएं : शोभा
भाजपा सांसद शोभा करंदलाजे ने कहा कि उत्तरी जिलों को अलग करने से कोई समस्या हल नहीं होगी। उन्होंने मैसूरु में कहा कि अंतरराज्यीय जल बंटवारा विवादों में न्याय पाने के लिए कर्नाटक को एकजुट रहना चाहिए। आंध्र प्रदेश व तेलंगाना जैसे राज्य विभाजन के बाद कमजोर हुए हैं। भाजपा हमेशा उत्तर कर्नाटक के साथ है लेकिन गठबंंधन सरकार के खिलाफ 2 अगस्त को पृथक राज्य के लिए बंद का आह्वान करना सही नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री कुमारस्वामी कुछ अवांछित टीका टिप्पणियां कर रहे हैं जिनकी वजह से उत्तर कर्नाटक के लोगों को पीड़ा हुई है। ऐसी टिप्पणियों के बजाय उनको प्रशासन पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी ने अपने आप को 3-4 जिलों तक ही सीमित कर रखा है और इस वजह से उत्तर कर्नाटक के लोग पृथक राज्य की मांग पर विवश हुए हैं।