
बेंगलूरु. जैन श्वेताम्बर तेरापंथ सभा यशवंतपुर के तत्वावधान में आयोजित 'जागे बोध श्रावक सम्बोध प्रतियोगिताÓ का पुरस्कार एवं सम्मान कार्यक्रम मुनि रणजीत कुमार एवं मुनि रमेश कुमार के सान्निध्य में आयोजित हुआ।
प्रतियोगिता दो चरणों में आयोजित की गई। प्रथम चरण में प्रति सप्ताह एक एक प्रश्न पत्र प्रतियोगियों को दिए गए। इस तरह कुल आठ प्रश्न पत्र हुए। इसमें 42 प्रतियोगिता ने भाग लिया।
उसके पश्चात दूसरे चरण की प्रतियोगिता तेरापंथ भवन में आयोजित हुई, जिसमें 24 प्रतियोगियों ने भाग लिया। इस प्रतियोगिता में सुमन कोठारी ने प्रथम स्थान, निकिता बरडिय़ा ने द्वितीय स्थान एवं चन्द्रा गुगलिया, बरखा पुगलिया, मधु पितलिया ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
इसके अतिरिक्त विमला पितलिया, मिनाक्षी दक, सुमन दक, लीला डूंगरवाल, नम्रता पितलिया को सांत्वना पुरस्कार से सम्मानित किया गया।
मुनि रणजीत कुमार ने कहा कि श्रावक सम्बोध के अध्ययन से श्रावकत्व का बोध होता है। आस्था का विकास होता है एवं निष्ठा प्रगाढ़ बनती है। मुनि रमेश कुमार ने कहा कि श्रावक सम्बोध से श्रावक आ आचरण कैसा हो, इसका बोध होता है।
जैन धर्म, दर्शन के साथ प्राचीन काल के श्रावकों की जीवन चर्या आदि अनेक महत्वपूर्ण जानकारियां प्राप्त होती हैं। मुख्य अतिथि वरिष्ठ श्रावक तत्वज्ञान एवं ज्ञानशाला प्रशिक्षक जुगराज नाहर ने कहा कि आचार्य तुलसी की अंतिम कृति है श्रावक सम्बोध।
श्रावक का आचार, विचार और व्यवहार कैसा होना चाहिए इसके अध्ययन से इन सबकी जानकारी प्राप्त होती है। तेरापंथ सभा के अध्यक्ष प्रकाश बाबेल, मंत्री गौतमचंद मूथा ने विचार व्यक्त किए।
संचालन में तेरापंथ सभा के सहमंत्री सुरेन्द्र सेठिया, संगठन मंत्री महावीर ओस्तवाल की सेवाएं रहीं। प्रतियोगियों को तैयार करने में मीनाक्षी दक ने भी प्रयास किया।
प्रश्नपत्र की जांच करके परिणाम तैयार करने में जुगराज नाहर ने अपनी सेवाएं दी। संचालन संगठन मंत्री महावीर ओस्तवाल ने किया।