देश में पहली बार बीएमसीआरआइ में आधुनिक अनुकरण प्रयोगशाला स्थापित
बेंगलूरु. राज्य सरकार ने बेंगलूरु मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (बीएमसीआरआइ) में एक आधुनिक अनुकरण प्रयोगशाला स्थापित की है जो छात्रों को चिकित्सा प्रक्रियाओं को सिखाने के लिए प्रायोगिक सिमुलेशन विधियों के उपयोग करने में सहयोग करेगी। 9,000 वर्ग फीट की सुविधा वाले इसे केन्द्र में एक न्यूरोसर्जिकल सिम्युलेटर भी है, जो देश में पहला है।
न्यूरोसर्जिकल सिम्युलेटर छात्रों को मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी जैसे महत्वपूर्ण सर्जरी का अभ्यास करने में मदद करेगा। सिम्युलेशन उपकरण इन प्रक्रियाओं के दौरान एक प्राकृतिक सर्जरी का अनुभव देता है, जबकि यह पूरी तरह से तकनीक आधारित कृत्रिम प्रयोग रहता है। बीएमसीआरआई ने कहा है कि सिम्युलेटर का उपयोग न्यूरो-एंडोस्कोपिक सर्जरी के लिए भी किया जा सकता है।
चिकित्सा शिक्षा विभाग ने सरकार द्वारा संचालित संस्थान में अनुकरण केंद्र स्थापित करने के लिए 22 करोड़ खर्च किए हैं। उम्मीद है कि इससे लगभग 2,000 छात्र लाभान्वित होंगे। बीएमसीआरआई ने कहा कि केन्द्र में कैथ लैब सिम्युलेटर की सुविधा नई दिल्ली के बाद दूसरी है।
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हेल्थकेयर पर्यटन केंद्र बनाना मकसद : मंत्री
चिकित्सा शिक्षा मंत्री डीके शिवकुमार ने कहा कि यह चिकित्सा क्षेत्र में लंबी यात्रा की सिर्फ शुरुआत है, क्योंकि कर्नाटक अपने सरकारी वित्त पोषित स्वास्थ्य संस्थानों में प्रौद्योगिकी का उपयोग करता है।
राज्य में कुल 26 स्वायत्त मेडिकल कॉलेज हैं, और हम अपने राज्य को हेल्थकेयर पर्यटन का केंद्र बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसके अतिरिक्त सरकार अपने स्वास्थ्य केन्द्रों में बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने के लिए सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) मॉडल भी तलाश रही है।
मेडिकल शिक्षा विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव वी मंजुला ने कहा, सरकार ने सिम्युलेशन सेंटर की स्थापना कर पहला मील का पत्थर पार कर लिया है। हालांकि इसमें अब बड़ी चुनौती है कि इसे पाठ्यक्रम के साथ एकीकृत किया जाए। उन्होंने कहा कि लैब का उपयोग करने के तरीके पर प्रशिक्षण देने के लिए जल्द ही संकाय सदस्यों के प्रशिक्षण का काम शुरु होगा।
प्रयोगशाला चिकित्सा विज्ञान के छात्रों के लिए वरदान होगी, क्योंकि उन्हें विभिन्न प्रकार की चिकित्सा जटिलताओं के मामलों को मशीन से सीखने में परेशानी होती है। सिम्युलेटर की मदद से छात्रों को एक ही सर्जरी की विधि को कई बार दोहराने में मदद मिलती है, जिससे बिना रोगी के जीवन को खतरे में डाले भविष्य के चिकित्सकों को बेहतर तरीके से प्रशिक्षित किया जा सकता है।
वहीं वास्तविक सर्जरी के दौरान ऐसी सुविधा नहीं मिल सकती है। इसके अतिरिक्त कई बार चिकित्सकों को सर्जरी की जिन चुनौतियों का पूरे पेशेवर जीवन में सामना नहीं होता है, उन जटिलताओं को भी वे सिमुलेटर पर समझते हैं।