स्वाध्याय करने से साधक आत्मा के ज्ञान आवरणीय कर्म का क्षय होता है।
बेंगलूरु. हनुमंतनगर जैन स्थानक में साध्वी सुप्रिया ने बुधवार को प्रवचन में उत्तराध्ययन सूत्र वांचना की पूर्णाहुति पर कहा कि इस सूत्र का स्वाध्याय परम कल्याणकारी, मंगलकारी और हितकारी है।
स्वाध्याय करने से साधक आत्मा के ज्ञान आवरणीय कर्म का क्षय होता है। स्वाध्याय करने से हमें नवीन ज्ञान की प्राप्ति होती है।
यह हमारे जीवन का प्रमुख सूत्र है। साध्वी ने प्रभु महावीर निर्वाण प्रसंग के साथ दीपावली पर्व से जुड़े ऐतिहासिक, आध्यात्मिक, पौराणिक प्रसंगों पर प्रकाश डाला।
इससे पूर्व मंगलवार को साध्वी सुप्रिया ने प्रवचन में भगवान महावीर की अंतिम देशना उत्तराध्ययन सूत्र पर विवेचन करते हुए कहा कि जो ज्ञानी आत्मा होती है, वही पापों से डरती है।
जीव का सबसे बड़ा अज्ञान यही है कि जानबूझ कर भी आसक्ति, लोभ, तृष्णावश ज्यादा पाप कार्यों की ओर ही प्रवृत्त रहता है।
मनुष्य जन्म बहुत दुर्लभ है। धर्म, सेवा, दान, पुण्य, परोपकार के कार्य करते हुए अनमोल मानव जीवन को सार्थक बनाएं। इस मनुष्य जन्म को पाने के लिए साक्षात देवता भी तरसते हैं।
उन्होंने आतिशबाजी के पर्यावरण पर पडऩे वाले प्रभाव बताए। साध्वी सुविधि ने उत्तराध्ययन सूत्र का वाचन किया।
संचालन संजय कुमार कचोलिया ने किया। नूतन वर्ष प्रारंभ वीर निर्वाण महोत्सव प्रसंग पर गुरुवार को सुबह नौ बजे महामांगलिक होगा।