बैंगलोर

आत्मा की अनुभूति अध्यात्म का सार

गुणीजनों को देखने पर तो आनंद और प्रेम झलकता है
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godwad bhavan
आत्मा की अनुभूति अध्यात्म का सार

बेंगलूरु. वर्धमान स्थानकवासी जैन श्रावक संघ चिकपेट शाखा के तत्वावधान में गोडवाड़ भवन में उपाध्याय रविंद्र मुनि के सान्निध्य में रमणीक मुनि ने कहा कि महाकवि जुगल किशोर मुख्तियार द्वारा रचित 'मेरी भावना' रचना में आत्मीय गुणों को बड़े तरीके से गूंथा गया है इस रचना कि यदि गहराई से चिंतन करें तो हमें अपनी आत्मा की अनुभूति होगी। आत्मा की अनुभूति ही अध्यात्म का सार है। यह समस्त क्रियाओं का नवनीत है।

उन्होंने 'मेरी भावना' के छठे पद की व्याख्या करते हुए कहा कि यह मंगलमय प्रार्थना की अद्भुत शक्ति है। प्रार्थना में बहुत शक्ति होती है। महापुरुषों के गुणों को शब्दों में रचना कर बनाई गई प्रार्थना को आत्मीयता से गाना चाहिए, ऐसी प्रार्थना के सान्निध्य में रहने से उस दिव्य शक्ति की ऊर्जा भी प्राप्त होती है। इसे भी भक्त ही अनुभव कर सकता है।

उन्होंने कहा कि गुणीजनों को देखने के बाद व्यक्ति के अंदर छिपी हुई कमी नजर आने लगती है। गुणी और दुर्गुणी के संसार में कोई बाधा नहीं है बाधा तो स्वयं के अंदर ही उपजती है। गुणीजनों को देखने पर तो आनंद और प्रेम झलकता है। प्रारंभ में उपाध्याय रविंद्र मुनि ने मंगलाचरण किया। रमणीक मुनि ने ओंकार का सामूहिक उच्चारण कराया। ऋषि मुनि ने गीतिका सुनाई।

पारस मुनि ने मांगलिक प्रदान किया। चिकपेट शाखा के महामंत्री गौतमचंद धारीवाल ने बताया कि बुधवार रात्रि से मुनिवृन्द की निश्रा में गोडवाड़ भवन में शुरू हुए 28 दिवसीय गौतम स्वामी का महामंगलकारी जाप मे बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। धन्यवाद महामंत्री गौतमचंद कटारिया ने दिया।


विरोध सफलता की सीढ़ी
चामराजनगर. गुंडलपेट स्थानक में साध्वी साक्षी ज्योति ने कहा कि विरोध को विनोद मानना चाहिए। विरोध सफलता की सीढ़ी है। जिस व्यक्ति का जितना अधिक विरोध होता है तो समझना चाहिए कि वह उतना ही अधिक ऊंचा उठ गया है, एक साधारण व्यक्ति का कोई विरोध नहीं कर सकता है।

Published on:
12 Oct 2018 06:13 pm