
एक मुस्लिम उद्यमी की मदद से 40 साल पूर्व प्रवासी बिहारियों ने शुरू की थी दुर्गा पूजा
बेंगलूरु. भारत में विभिन्न धर्मों के लोग हमेशा से एक दूसरे के तीज-त्योहार में बढ़-चढ़ कर भाग लेते रहे हैं। 40 वर्ष पूर्व जब बिहार से बेंगलूरु आए कुछ प्रवासियों ने यहां दुर्गा पूजा करने का सपना संजोया, तब भी आपसी भाइचारे की ऐसी ही मिसाल बेंगलूरु में देखने को मिली और बिहारियों का दशहरा महोत्सव 'धर्मनिरपेक्षता का प्रतीक' बन गया। चार दशक पूर्व बेंगलूरु में बिहार के लोगों के दुर्गा पूजा का सूत्रपात करने का श्रेय सिद्धार्थ सांस्कृतिक समिति को जाता है। समिति के प्रचार प्रसार मंत्री अरविंद शर्मा बताते हैं कि उस समय प्रवासी बिहारियों के लिए बेंगलूरु में दुर्गा पूजा आयोजन करना अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा था।
बेंगलूरु पूरी तरह से एक भिन्न संस्कृति वाला शहर था। यहां दुर्गा पूजा करने के लिए प्रतिमा से लेकर पंडाल बनाने और पूजन सामग्री जुटाने तक का काम आसान नहीं था। ऐसे प्रवासी बिहारियों को एक स्थानीय मुस्लिम समुदाय के उद्यमी बरकतुल्ला साहेब का साथ मिला और उनके महत्वपूर्ण सहयोग से ही वर्ष-1979 में पहली बार दशहरा महोत्सव आयोजित हुआ। उन्होंने दस दिवसीय महोत्सव के लिए बेंगलूरु छावनी के पास बोर बैंक रोड स्थित अपनी फैक्टरी परिसर में पांडाल बनवाया और इस प्रकार एक के सहयोग से प्रवासी बिहारियों का दशहरा मनाने का सपना साकार हुआ।
शर्मा कहते हैं कि इसलिए समिति का दशहरा महोत्सव धर्मनिरपेक्षा का प्रतीक है।
उस समय बेंगलूरु में देवी प्रतिमा बनाने वाले मूर्तिकार न के बराबर थे लेकिन यह चुनौती भी प्रवासियों के संकल्प को डिगा नहीं सका और वे पश्चिम बंगाल से देवी प्रतिमा ले आए। इसी प्रकार पूजन भी बिहार और कोलकाता से लाई गई। पिछले चार दशकों में समिति ने बिहार से आए हजारों प्रवासियों को अपनी लोक संस्कृति से जोडऩे का काम किया है। हर वर्ष दशहरा में हजारों श्रद्धालु परम्परागत बिहारी शैली में देवी पूजन करने समिति के पूजा पंडाल में आते हैं जहां पूजा, विधि विधान, सांस्कृतिक कार्यक्रमों आदि पर पूरी तरह से बिहारी लोक संस्कृति की छाप दिखती है। बरकतुल्ला साहेब की फैक्टरी से शुरू समिति का दशहरा महोत्सव अब भव्य रूप ले चुका है।
पिछले एक दशक से समिति का दशहरा महोत्सव पैलेस ग्राउंड में हो रहा है। इस बार भी समिति के अध्यक्ष और बिहार विधान परिषद के सदस्य कृष्ण कुमार सिंह के मार्गदर्शन तथा पूजा उपसमिति के अध्यक्ष उपेन्द्र कुमार सिंह की अध्यक्षता में प्रिंसेज श्राइन में दशहरा मनाया जा रहा है।
सचिव सुबोध कुमार के अनुसार समिति की पहचान अब कन्नाडिग़ा बिहारी के रूप में हो चुकी है। यानी प्रवासी की तीसरी और चौथी पीढ़ी जो बेंगलूरु में पैदा हुई उसकी जड़ें बिहार से जुड़ी हैं लेकिन कर्मभूमि के नाते अब वे बेंगलूरु में कन्नाडिग़ा बिहारी हो चुके हैं।
Updated on:
12 Oct 2018 06:02 pm
Published on:
12 Oct 2018 06:02 pm
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