बैंगलोर

Karnataka सरकार ने इस बार संभावित जलसंकट से निपटने कई स्तर पर की हैं तैयारियां

पिछले साल सूखे की मार झेलने के बाद राज्य के कई हिस्सों में पीने के पानी की भारी कमी देखी गई। इसलिए राज्य सरकार ने इस बार गर्मी में संभावित संकट से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण तैयार किया है।

2 min read

बेंगलूरु. पिछले साल सूखे की मार झेलने के बाद राज्य के कई हिस्सों में पीने के पानी की भारी कमी देखी गई। इसलिए राज्य सरकार ने इस बार गर्मी में संभावित संकट से निपटने के लिए बहुआयामी दृष्टिकोण तैयार किया है।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (आइएमडी) और अन्य अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा सामान्य मानसून की भविष्यवाणी के बावजूद, सरकार ने संभावित चिंताओं को दूर करने के लिए राज्य, जिला, तालुक और ग्राम पंचायत स्तर पर एहतियाती उपाय शुरू किए हैं।

आइएमडी की भविष्यवाणी के अनुसार, उत्तरी आंतरिक कर्नाटक (एनआइके) जिलों और तटीय जिलों के कुछ हिस्सों में सामान्य से अधिक अधिकतम तापमान रहने की उम्मीद है। दक्षिण आंतरिक कर्नाटक (एसआइके) जिलों और मलनाड क्षेत्र के अधिकांश हिस्सों में सामान्य अधिकतम तापमान रहने की संभावना है।

राजस्व मंत्री कृष्ण बैरेगौड़ा की अध्यक्षता में आपदा प्रबंधन पर कैबिनेट उप-समिति जल उपयोग की निगरानी कर रही थी और बहुस्तरीय संस्थागत हस्तक्षेप शुरू कर रही थी।

ग्रामीण विकास एवं पंचायत राज (आरडीपीआर) मंत्री प्रियांक खरगे के अनुसार सरकार सूक्ष्म और वृहद दोनों स्तरों पर इस मुद्दे से निपट रही है। उन्होंने कहा कि वृहद स्तर पर, हमने सिंचाई विभाग से पानी छोडऩे में सावधानी बरतने का अनुरोध किया है (पीने के उद्देश्यों के लिए पर्याप्त पानी छोडऩे के लिए) और सीएम ने अन्य राज्यों को भी हमारे हिस्से का पानी छोडऩे के लिए लिखा है। सूक्ष्म स्तर पर, टास्क फोर्स समितियों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।

मंत्री ने बताया कि जल संकट की स्थिति में, कायाकल्प को पहली प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा, यदि नहीं, तो हम निजी बोरवेल, पानी के टैंकर किराए पर लेने और अंतिम विकल्प के रूप में, यदि स्रोत हैं तो बोरवेल खोदने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 41 तालुक और 104 ग्राम पंचायतें पेयजल समस्या का सामना कर रही हैं। 28 मार्च तक, 42 गांवों में टैंकरों के माध्यम से पीने का पानी दिया गया है, जबकि 124 गांवों को किराए के निजी बोरवेल से पीने का पानी दिया गया है। रामनगर जिला इस सूची में सबसे ऊपर है, जहां ऐसे गांवों की संख्या सबसे ज्यादा 21 है।

सूत्रों ने बताया कि 30 जून तक पीने के पानी के उपयोग की पूरी योजना तैयार है। उन्होंनेे कहा, विभिन्न लिफ्ट सिंचाई योजनाओं, आरडीपीआर जल जीवन जल योजनाओं और शहरी स्थानीय निकायों के लिए जलाशयों की सभी आवश्यकताओं को पूरा कर लिया गया है।

कित्तूर कर्नाटक क्षेत्र के विजयपुर और बागलकोट जिलों के साथ-साथ सात कल्याण कर्नाटक जिलों में सरकारी कार्यालयों के समय में बदलाव किया गया है (सुबह 8 से दोपहर 1.30 बजे तक)। भीषण गर्मी से बेहतर तरीके से निपटने के लिए। अनुमानित जल कमी वाले अधिकांश जिले निजी बोरवेल और पानी के टैंकरों के माध्यम से संभावित संकट को कम करने की कोशिश कर रहे हैं।

Published on:
06 Apr 2025 10:48 pm
Also Read
View All

अगली खबर