सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत बीबीपी में विश्वस्तरीय पब्लिक एक्वेरियम बनाने का फैसला किया है। करीब 144.4 करोड़ रुपए की लागत वाले इस एक्वेरियम में एशिया, अमेजन, अफ्रीका और कोरल रीफ क्षेत्रों के समुद्री और मीठे पानी के जीवों को प्रदर्शित किया जाएगा।
कर्नाटक Karnataka के दो सबसे लोकप्रिय चिडिय़ाघर अब हाईटेक और विश्वस्तरीय पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किए जाएंगे। बेंगलूरु के बन्नेरघट्टा जैविक उद्यान Bannerghatta Biological Park (बीबीपी) और मैसूरु के चामराजेंद्र प्राणी उद्यान (मैसूरु चिडिय़ाघर) Mysuru Zoo में जल्द ही आधुनिक सुविधाओं से लैस प्रोजेक्ट शुरू होंगे।
राज्य सरकार ने करीब 224 करोड़ रुपए की इन परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। सरकार ने सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल के तहत बीबीपी में विश्वस्तरीय पब्लिक एक्वेरियम बनाने का फैसला किया है। करीब 144.4 करोड़ रुपए की लागत वाले इस एक्वेरियम में एशिया, अमेजन Amazon, अफ्रीका और कोरल रीफ क्षेत्रों के समुद्री और मीठे पानी के जीवों को प्रदर्शित किया जाएगा। यहां वॉक-थ्रू टनल Walk-through Tunnel, एडवांस लाइफ सपोर्ट सिस्टम, क्वारंटाइन टैंक और पर्यावरण अनुकूल जीरो लिक्विड डिस्चार्ज जैसी सुविधाएं होंगी। पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए ग्लास-बॉटम बोट राइड, स्कूबा डाइविंग scuba diving और केज स्नॉर्कलिंग जैसी एडवेंचर गतिविधियां भी शुरू की जाएंगी। साथ ही डिजिटल इमर्सिव सिस्टम के जरिए समुद्री दुनिया का अनोखा अनुभव मिलेगा। आगंतुक इस विश्व-स्तरीय एक्वेरियम के भीतर स्कूबा-डाइविंग जैसे पानी के नीचे के अनुभवों का स्वाद ले सकेंगे।
दोनों चिडिय़ाघरों में इमर्सिव वाइल्डलाइफ रूम Immersive Wildlife Room भी बनाए जाएंगे, जहां 360 डिग्री प्रोजेक्शन और विशेष ऑडियो शो के जरिए भारत की जैव विविधता और वन्यजीव संरक्षण की जानकारी दी जाएगी। इन केंद्रों को खासतौर पर स्कूली बच्चों और परिवारों के लिए तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा, एक डिजिटल जू गाइड भी शुरू होगा। क्यूआर कोड आधारित इस सुविधा के जरिए पर्यटक बिना ऐप डाउनलोड किए अपने मोबाइल पर चिडिय़ाघर का नक्शा, जानवरों की जानकारी, बहुभाषी ऑडियो गाइड और ऑगमेंटेड रियलिटी फीचर्स का इस्तेमाल कर सकेंगे। मैसूरु परियोजना पर 44.62 करोड़ रुपए और बन्नेरघट्टा परियोजना पर 35.22 करोड़ रुपए खर्च किए जाएंगे।
इन परियोजनाओं को 20 वर्ष के डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत विकसित किया जाएगा। डीबीएफओटी एक पीपीपी मॉडल है, जिसमें निजी डेवलपर किसी बुनियादी ढांचे की परियोजना को डिजाइन, वित्तपोषित, निर्माण और संचालित करता है। एक निश्चित अवधि के बाद, परियोजना सरकार को हस्तांतरित कर दी जाती है।