बैंगलोर

पश्चिम एशिया संकट से कॉफी निर्यात प्रभावित

निर्यातकों का कहना है कि आमतौर पर कॉफी का बड़ा हिस्सा दुबई के जेबेज अली बंदरगाह के जरिए खाड़ी देशों तक पहुंचता है, लेकिन मौजूदा संकट के कारण कई खेपों की आवाजाही प्रभावित हुई है। शिपिंग शेड्यूल में अनिश्चितता के कारण निर्यातकों को लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थिति का असर माल ढुलाई लागत पर भी पड़ा है।
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Mar 18, 2026
कॉफी निर्यात में बाधा
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-परिवहन लागत छह गुना तक बढ़ी

पश्चिम एशिया में जारी संकट के कारण कर्नाटक Karnataka के तटीय व्यापारिक केंद्र मेंगलूरु से खाड़ी देशों को होने वाले कॉफी निर्यात coffee export में बाधा आ रही है। निर्यातकों के अनुसार शिपमेंट में देरी हो रही है और समुद्री माल ढुलाई शुल्क में कई गुना वृद्धि हो गई है, जिससे व्यापारियों की सप्लाई चेन प्रभावित हो रही है।

कई खेपों की आवाजाही प्रभावित

निर्यातकों का कहना है कि आमतौर पर कॉफी का बड़ा हिस्सा दुबई के जेबेज अली बंदरगाह के जरिए खाड़ी देशों तक पहुंचता है, लेकिन मौजूदा संकट के कारण कई खेपों की आवाजाही प्रभावित हुई है। शिपिंग शेड्यूल में अनिश्चितता के कारण निर्यातकों को लॉजिस्टिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

स्थिति का असर माल ढुलाई लागत पर भी पड़ा है। निर्यातकों के मुताबिक 20 टन कंटेनर को जेबेल अली भेजने का फ्रेट पहले करीब 578 डॉलर था, जो अब बढ़कर लगभग 3,800 डॉलर तक पहुंच गया है। वहीं कुवैत के शुवैख बंदरगाह के लिए कंटेनर भेजने का खर्च 850 डॉलर से बढ़कर करीब 4,500 डॉलर हो गया है।

वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं

मेंगलूरु के एक कॉफी निर्यातक ने बताया कि यूएई के प्रमुख बंदरगाहों में व्यवधान के कारण निर्यातकों को वैकल्पिक मार्ग अपनाने पड़ रहे हैं। अब कई व्यापारी ओमान के सोहर बंदरगाह के जरिए माल भेज रहे हैं, जहां से सड़क मार्ग से खाड़ी देशों तक आपूर्ति की जा रही है। हालांकि, इस नई व्यवस्था से परिवहन लागत लगभग छह गुना तक बढ़ गई है।

निर्यातकों का कहना है कि यदि पश्चिम एशिया West Asia की स्थिति जल्द सामान्य नहीं होती है तो कर्नाटक से कॉफी निर्यात की मात्रा और अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा पर असर पड़ सकता है।

Updated on:
18 Mar 2026 06:35 pm
Published on:
18 Mar 2026 06:35 pm