बांसवाड़ा

Rajasthan New Rail Line: राजस्थान में यहां बिछेगी 380KM लंबी नई रेल लाइन, फाइनल सर्वे के लिए 9.5 करोड़ मंजूर; 4 राज्यों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी

Neemuch-Banswara New Rail Track: बांसवाड़ा सहित दक्षिणी राजस्थान के लाखों की उम्मीदों को एक बार फिर रेलवे मंत्रालय ने पंख लगा दिए हैं। सरकार ने नीमच-बांसवाड़ा 380 किमी रेल ट्रैक के फाइनल सर्वे के लिए साढ़े 9 करोड़ स्वीकृत किए है।

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Photo: AI-generated

बांसवाड़ा। सब कुछ ठीक रहा तो आने वाले वर्षों में मालवा के रास्ते वागड़ के बांसवाड़ा जिले में आजादी के लंबे कालखण्ड के बाद रेल आ सकती है। बांसवाड़ा सहित दक्षिणी राजस्थान के लाखों की उम्मीदों को एक बार फिर रेलवे मंत्रालय ने पंख लगा दिए हैं। सरकार ने नीमच-बांसवाड़ा-दाहोद-नंदुरबार नई रेल लाइन के फाइनल लोकेशन सर्वे के लिए टेंडर आमंत्रित किए हैं। करीब 380 किमी की यह परियोजना के लिए रेल मंत्रालय से मंजूरी मिल गई है।

सरकार ने नीमच-बांसवाड़ा 380 किमी रेल ट्रैक के फाइनल सर्वे के लिए साढ़े 9 करोड़ स्वीकृत किए है। भविष्य में रेलवे ट्रैक बनता है, तो राजस्थान, मध्यप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र 4 राज्यों की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। साथ ही दिल्ली-मुंबई के लिए वैकल्पिक मार्ग भी मिलेगा।

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ट्रैक : विकास के खोलेगा द्वार

1. 4 राज्यों की कनेक्टिविटी: यह ट्रैक बनता है, तो मध्यप्रदेश, राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र 4 राज्य आपस में जुड़ेंगे। यह क्षेत्र यूं भी व्यापारिक एवं सांस्कृतिक संस्कृति से जुड़े हुए हैं। ऐसे में ट्राइबल कनेक्टिविटी के साथ ही औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलेगा।
2. दिल्ली-मुंबई का वैकल्पिक मार्ग: पूरे देश को दिल्ली-मुंबई का एक नया मार्ग मिलेगा। यह कम घुमाव दार होने के साथ ही दूरी भी करीब 150-200 किलोमीटर कम होगी।
3. खनिज परिवहन को गति: दक्षिणी राजस्थान से निकलने वाला मैंगनीज, डोलोमाइट, चूना पत्थर, मार्बल, सोप स्टोन, क्वार्ट्ज आदि खनिजों के परिवहन में वृद्धि होगी।
4. टूरिज्म डवलमेंट: दक्षिणी राजस्थान जैव विविधता के साथ ही समृद्ध होने के साथ ही ऐतिहासिक धार्मिक नगरी है। ऐसे में यहां पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। यह क्षेत्र रेल मार्ग से जुडने से टूरिज्म बढ़ेगा।

साढ़े 9 करोड़ स्वीकृत

रेल मंत्रालय ने बांसवाड़ा जिले को रेल सुविधा से जोड़ने के लिए नीमच-नंदुरबार वाया बांसवाड़ा नई रेल लाइन की घोषणा की थी। करीब आठ माह तक यह घोषणा में ही अटकी रही। पर, अब सरकार ने परियोजना को मंजूरी दे दी है। करीब 380 किमी के इस ट्रैक के लिए पश्चिमी रेलवे फाइनल लोकेशन सर्वे (एफएलएस) के लिए निविदाएं कर रही है। एफएलएस के लिए सरकार ने साढ़े 9 करोड़ रुपए का बजट तय किया है।

भविष्यः डूंगरपुर-बांसवाड़ा बनेगा जंक्शन

आरटीई कार्यकर्ता गोपीराम अग्रवाल ने बताया कि वर्ष 2011 में यूपीए सरकार ने डूंगरपुर रतलाम वाया बांसवाड़ा रेलवे लाइन भी स्वीकृत की थी। पर, राज्य एवं केन्द्र के 50-50 की सांझेदारी में अटक गया। पर, अब केन्द्र सरकार ने यह परियोजना अपने हाथ में ले ली है।

डूंगरपुर में पहले से ही रेल चल रही है और गुजरात से कनेक्टिविटी है। यदि डूंगरपुर-रतलाम वाया बांसवाड़ा तथा नीमच-नंदुरबार वाया बांसवाडा दोनों प्रोजेक्ट परे हो जाते हैं, तो डूंगरपुर-बांसवाड़ा पूरे देश से जुड़ जाएगा। केन्द्र और प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार है। ऐसे में क्षेत्रीय नेताओं को पूरा दबाव बनाकर दोनों परियोजनाएं जल्द पूरी करवानी चाहिए।

एफएलएस : हमारा ट्रैक पक्का

गौरतलब है कि रेलवे एफएल सर्वे तब ही होता है जब ट्रैक बनाना होता है। इस सर्वे के तहत इस पूरे ट्रैक का रोड मैप तैयार होगा। कितनी भूमि अधिग्रहण, स्टेशन कहां बनेंगे, किन गांवों-कस्बों से ट्रैक गुजरेगा आदि की रिपोर्ट बनाकर मंत्रालय को दी जाएगी।

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