बांसवाड़ा

एंकर ‘जीवन में गुरु के बिना आत्मज्ञान संभव नहीं’

Rajasthan

सागवाड़ा. सनातन परंपरा के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व कान्हडदास धाम बड़ा रामद्वारा में मनाया गया।
शाहपुरा धाम के रामस्नेही संत कीर्तिराम ने गुरु पूर्णिमा ने कहा कि गुरु ही शिव है। शिव ही गुरु है। गुरु के बिना आत्मज्ञान संभव नहीं और आत्मज्ञान के बिना मुक्ति संभव नहीं। मनुष्य अवतार का एकमात्र उद्देश्य उस परम चेतना से जुड़ जाना है। उन्होंने बताया कि गुरु पूर्णिमा के दिन गुरु चेतना विशेष रूप से जागृत रहती है। यह दिन श्रद्धा, समर्पण और कृतज्ञता का दिव्य उत्सव है। गुरु केवल ज्ञान प्रदान ही नहीं करते, बल्कि जीवन को दिशा देते हैं। वे अज्ञानता का तमस दूर कर आत्मबोध का प्रकाश जगाने वाले होते हैं। संत ने कहा कि यह त्योहार महान ऋषि भगवान वेदव्यास के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है। सनातन संस्कृति में गुरु को ब्रह्मा, विष्णु और महेश के समान सर्वोच्च स्थान दिया गया है। गुरु के सान्निध्य में केवल शास्त्रों का ज्ञान ही नहीं मिलता, बल्कि विनम्रता, अनुशासन, तप, त्याग, सेवा, करुणा और निष्काम कर्म का व्यावहारिक आदर्श भी प्राप्त होता है। प्रवक्ता बलदेव सोमपुरा ने बताया कि सत्संग के प्रारंभ में संत एवं भक्तों द्वारा रामचरण महाराज की तस्वीर की पूजा-अर्चना की गई। भक्तिमय वातावरण में ‘कभी राम बनके कभी श्याम बनके चले आना’ भजन गाया। संत प्रसाद संगीता सेवक परिवार की ओर से हुआ। इस दौरान जगदीश गुप्ता, अनिल वाडेल, जयंतीलाल कंसारा, प्रहलाद भावसार, दिनेश शर्मा, अशोक भट्ट, विष्णु सेवक, नाथू परमार, हेमंत सोमपुरा, सुरेश ठाकुर, सुरेंद्र शर्मा, जिग्नेश भावसार, देवीलाल सोनी, देवलता वाडेल, जोशना शर्मा, विमल ठाकुर, अनीता सुथार, संगीता सोनी, सपना सेवक, प्रेमलता भट्ट, प्रेमलता सुथार मौजूद रही।

Updated on:
30 Jul 2026 06:02 am
Published on:
30 Jul 2026 06:02 am