
Banswara Accident: गहरे शोक में डूबे हयान के पिता डॉ. राजेश वसानिया और चिकित्सक के सामने बिलखती मां (फोटो-पत्रिका)
बांसवाड़ा। "बेटा कह रहा था, पापा… भैया ड्रोन लेकर आएंगे, हम उससे वीडियो बनाएंगे। अब बताओ, वो ड्रोन कौन उड़ाएगा… मेरा लाड़ला तो चला गया।" यह कहते-कहते आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ. राजेश वसानिया की आंखों से आंसू छलक पड़े। बुधवार सुबह हुए स्कूल वैन हादसे ने उनके 16 वर्षीय बेटे हयान की जिंदगी ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार के सपनों को भी हमेशा के लिए खत्म कर दिया। घर में जन्मदिन की खुशियां मनाने की तैयारी थी, लेकिन कुछ ही घंटों में वही घर मातम में बदल गया।
हादसे से पहले हयान रोज की तरह स्कूल जाने के लिए तैयार हुआ। घर से निकलते समय उसने मां-पिता को गले लगाया और मुस्कुराकर कहा, "आई लव यू मम्मा… आई लव यू पापा। दो बजे लौट आऊंगा, फिर भैया का बर्थडे मनाएंगे।" गुरु पूर्णिमा होने पर मां ने मंदिर जाने को कहा तो हयान ने जवाब दिया, "मेरे लिए आप दोनों ही गुरु हो।" किसी को अंदाजा नहीं था कि यह उसके जीवन की आखिरी बातचीत होगी।
परिवार के बड़े बेटे कलश वसानिया नौकरी के सिलसिले में वियतनाम गए हुए थे। वापसी के दौरान वे हयान के लिए खास तौर पर ड्रोन खरीदकर ला रहे थे। हयान कई दिनों से उत्साहित था। उसने ड्रोन से नई-नई वीडियो बनाने और सोशल मीडिया पर बेहतर कंटेंट तैयार करने की योजना बना रखी थी। लेकिन भाई के घर पहुंचने से पहले ही हादसे ने सब कुछ छीन लिया। पिता की जुबान पर अब सिर्फ एक सवाल है- "जिस ड्रोन का इंतजार था, अब उसे कौन उड़ाएगा?"
कक्षाध्यापक धर्मवीर सिंह ने बताया कि हयान पढ़ाई में बेहद मेधावी छात्र था। गणित और विज्ञान उसके प्रिय विषय थे। पिछले वर्ष कक्षा 9 में उसने 93 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। पढ़ाई के अलावा उसे तबला वादन और हैंडबॉल खेलने का भी विशेष शौक था। शिक्षक बताते हैं कि वह अनुशासित, जिज्ञासु और हमेशा कुछ नया सीखने वाला विद्यार्थी था।
परिजनों ने बताया कि गर्मी की छुट्टियों में डॉ. राजेश वसानिया पूरे परिवार के साथ हयान को लेह-लद्दाख घुमाने ले गए थे। वहीं से लौटने के बाद उसने सोशल मीडिया पर अपनी यात्रा के वीडियो और तस्वीरें साझा करनी शुरू की थीं। परिवार को उम्मीद थी कि पढ़ाई के साथ-साथ वह अपनी इस प्रतिभा को भी नई पहचान देगा, लेकिन अब उसकी मुस्कुराती तस्वीरें ही यादों का सहारा बन गई हैं।
अपने बेटे को खोने के बाद भी डॉ. राजेश वसानिया की सबसे बड़ी चिंता दूसरे बच्चों की सुरक्षा है। उनका कहना है कि अगर स्कूलों में सुरक्षित परिवहन व्यवस्था होती और नियमों का सख्ती से पालन किया जाता तो शायद आज उनका बेटा जिंदा होता। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि स्कूल वैन और ऑटो की नियमित जांच हो, ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई हो और हर बच्चे को सुरक्षित परिवहन उपलब्ध कराया जाए।
Updated on:
30 Jul 2026, 3:46 PM IST
Published on:
30 Jul 2026, 6:00 AM IST
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