बांसवाड़ा

राजस्थान के इस जिले में 15 साल में 242 पंचायतें बढ़ने से मजबूत हुआ पंचायती राज

Banswara News: राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में पिछले 15 साल में पंचायतों की संख्या 307 से बढ़कर वर्तमान में 549 तक पहुंच गई है।

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Photo- AI

Banswara News: पंचायतीराज व्यवस्था में पंचायतें सशक्त हो रहीं हैं। विकास योजनाओं के क्रियान्वयन और उसकी मॉनीटरिंग की जिम्मेदारियां बढ़ने से गांवों की तस्वीर बदल रही है। पिछले 15 सालों की बात करें तो जिले में पंचायतों की संख्या 307 से बढ़कर वर्तमान में 549 तक पहुंच गई है।

वर्ष 2011 में जहां बांसवाड़ा जिले में कुल 307 ग्राम पंचायतें थीं, वहीं 2025 में नई गठित पंचायतों से अब यह संख्या बढ़कर 549 हो गई है। नवीन पंचायतों के गठन से न केवल पंचायती राज को मजबूती मिली है, बल्कि छोटे-छोटे गांवों ने भी विकास की रफ्तार को पकड़ा है।

पंचायती राज व्यवस्था में महिलाओं के आरक्षण से पंचायतों में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ा और ग्रामीण महिलाएं घर की दहलीज पार कर राजनीति की नई सीढ़ीयां चढ़ रही हैं। जानते हैं बांसवाड़ा के पिछले 15 साल का पंचायती राज का सफर

आधी आबादी को मिला 50 प्रतिशत आरक्षण

पंचायती राज में पंचायत गठन के साथ ही महिलाओं का आरक्षण भी बढ़ा। साल 1995 से पहले महिलाओं के पंचायत चुनाव लड़ने को लेकर आरक्षण का निर्धारण नहीं था। लेकिन वर्ष 1995 से महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण की शुरुआत हुई, जिसे 2020 में बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया है। वर्तमान में आधी आबादी पंचायतों में नेतृत्व कर रही है और विकास की नई गाथा लिख रही है।

ऑनलाइन हुई प्रणाली से सुगम हुए काम

पंचायतीराज व्यवस्था में त्रि-स्तरीय व्यवस्थाएं होने से पंचायतें सशक्त हुई। पहले सरपंच ही प्रधान को चुनते थे। त्रिस्तरीय व्यवस्था के तहत पंचायती राज सदस्य की कड़ी और जुड़ गई, जो अब प्रधान को चुनते हैं। वहीं जिला परिषद सदस्य जिला प्रमुख को चुनते हैं।

पंचायतों में ई-वर्क सिस्टम लागू होने से काम के सेंशन की सभी प्रक्रिया ऑनलाइन हो चुकी हैं। अब आम आदमी गांवों के विकास कार्य को देख सकता है। पूर्व में अविवादित नामांतरण, बंटवारा और भूमि प्रबंधन का अधिकार पहले से ही मिला है। पंचायत स्तर पर शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, निर्माण समेत अन्य समितियों की मॉनीटरिंग की जिम्मेदारी है।

इस तरह बढ़ी पंचायतें

साल 2011 में बांसवाड़ा जिले में कुल 307 ग्राम पंचायतें थी। इसके बाद 2014 में नई पंचायतें जुड़ी, जिससे इनकी संख्या बढ़कर 346 हुई। 2019 में ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़कर 417 हुईं, जो अब 2025 में फिर से हुए पुनर्गठन में बढ़कर 549 तक पहुंच गई हैं।

मॉनिटरिंग हुई मजबूत…

अप्रत्यक्ष तौर पर गांवों में विकास की जिम्मेदारी में पंचायतों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नए पंचायतों के गठन से पंचायती राज की मॉनिटरिंग मजबूत हुई है। समय के साथ ऑनलाइन कार्यप्रणाली होने से कार्य की सुगमता और पारदर्शिता में सुधार हुआ है। साथ ही पंचायती राज को मजबूती मिली है।

  • डॉ. इंद्रजीत यादव, जिला कलक्टर एवं प्रशासक जिला परिषद
Updated on:
24 Apr 2026 04:16 pm
Published on:
24 Apr 2026 04:15 pm
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