
पंचायती राज दिवस Image Source: ChatGpt
जयपुर: हर साल 24 अप्रेल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है। पहला राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस 24 अप्रेल 2010 को मनाया गया था। यह दिन भारत में गांव स्तर पर लोकतंत्र को मजबूत करने वाली पंचायती राज व्यवस्था को संवैधानिक आधार मिलने के लिए मनाया जाता है। खास बात यह है कि इस व्यवस्था की पहली शुरुआत राजस्थान की धरती से हुई थी। 2 अक्टूबर 1959 को तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने राजस्थान के नागौर जिले में पंचायती राज व्यवस्था का उद्घाटन किया था।
भारत में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत सबसे पहले राजस्थान के नागौर जिले के बगदरी गांव में हुई थी। भारत में आधुनिक पंचायती राज व्यवस्था की नींव महात्मा गांधी के ग्राम स्वराज के विचार से जुड़ी मानी जाती है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए 2 अक्टूबर 1959, को गांधी जयंती के दिन राजस्थान के नागौर में पंचायती राज व्यवस्था की शुरुआत की गई। इसका उद्घाटन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने किया था।
हालांकि, पंचायतों की अवधारणा भारत में पहले से मौजूद थी, लेकिन इसे कानूनी और संवैधानिक आधार 73वें संविधान संशोधन से मिला। यह संशोधन 24 अप्रेल 1993 से लागू हुआ। इसके बाद पंचायतों को संवैधानिक दर्जा मिला और गांवों में स्थानीय स्वशासन को मजबूती मिली। इसी ऐतिहासिक दिन की याद में हर साल 24 अप्रेल को राष्ट्रीय पंचायती राज दिवस मनाया जाता है।
भारत की पंचायती राज व्यवस्था तीन स्तरों पर काम करती है।
ग्राम पंचायत- गांव स्तर पर काम करती है। इसका प्रमुख सरपंच या प्रधान होता है, जिसे गांव के लोग सीधे चुनते हैं।
पंचायत समिति- ब्लॉक या तहसील स्तर पर योजनाओं का समन्वय करती है।
जिला परिषद- पूरे जिले की पंचायतों की निगरानी और विकास योजनाओं को दिशा देती है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य यह है कि गांव की समस्याओं का समाधान गांव के स्तर पर ही हो और लोगों को छोटे-छोटे कामों के लिए बड़े प्रशासनिक दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें।
ग्राम पंचायत गांव की सबसे महत्वपूर्ण स्थानीय संस्था मानी जाती है। इसका काम गांव में सड़क, पानी, सफाई, स्ट्रीट लाइट, नाली, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, सरकारी योजनाओं का क्रियान्वयन और सामाजिक कल्याण से जुड़े कार्यों को देखना होता है। इसके अलावा विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन - ग्रामीण, प्रधानमंत्री आवास योजना, शौचालय निर्माण, पेयजल व्यवस्था और ग्रामीण विकास योजनाओं की निगरानी भी ग्राम पंचायत के जरिए ही होती है। सरपंच और वार्ड पंच मिलकर इन कार्यों को आगे बढ़ाते हैं।
Updated on:
24 Apr 2026 10:02 am
Published on:
24 Apr 2026 10:01 am
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