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Rajasthan Temple Mystery: राजस्थान का अनोखा मंदिर, जहां आज भी राक्षस को पिलाया जाता है हजारों लीटर पानी

Rajasthan Temple Mystery: पाली के भाटुंद गांव का शीतला माता मंदिर, जहां घड़ा हजारों लीटर पानी डालने के बाद भी नहीं भरता लेकिन माता के भोग के बाद भर जाता है।

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पाली

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Nikhil Parmar

Apr 17, 2026

Rajasthan Temple Mystery

शीतला माता का चमत्कार और घड़े में पानी डालती महिलाएं Image Source: ChatGpt

Rajasthan Temple Mystery: राजस्थान के पाली जिले के बाली क्षेत्र के भाटुंद गांव में स्थित शीतला माता का मंदिर आज भी एक अनोखे रहस्य के लिए जाना जाता है। इस मंदिर में एक छोटा सा घड़ा बना हुआ है, जिसकी गहराई और चौड़ाई लगभग आधा-आधा फीट बताई जाती है। हैरान करने वाली बात यह है कि इस घड़े में हजारों लीटर पानी डालने के बावजूद यह कभी भरता नहीं दिखता। स्थानीय लोग बताते है कि यह परंपरा उनके गांव में करीब 800 साल से चली आ रही है और आज भी उतनी ही श्रद्धा से निभाई जा रही है।

शीतला सप्तमी और ज्येष्ठ पूर्णिमा पर होता है आयोजन

इस घड़े में पानी डालने की परंपरा साल में दो बार होती है- शीतला सप्तमी और ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा पर। इन दोनों दिन गांव की महिलाएं कलश भर-भरकर इस घड़े में पानी डालती हैं। बताया जाता है कि इस दौरान हजारों लीटर पानी घड़े में डाला जाता है, लेकिन घड़ा नही भरता। इन दो दिनों गांव में भव्य मेला भी लगता है, जिसमें आसपास के लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं।

राक्षस पीता है सारा पानी

गांव में प्रचलित मान्यता के अनुसार, सैकड़ों साल पहले यहां बाबरा नाम का एक राक्षस रहता था, जो हर शादी में दूल्हे को मार देता था। इससे परेशान होकर गांव के ब्राह्मणों ने शीतला माता की तपस्या की। माता एक भक्त के सपने में आयी । उस को आश्वासन दिया कि आने वाले अगले विवाह मेें उन्हें राक्षस से मुक्ति मिल जाएगी। बाद में एक शादी के दौरान माता ने उस राक्षस का वध कर दिया। मरते समय राक्षस ने शीतला माता से गुहार लगाकर एक वरदान मांगा। उसने अपनी पानी की प्यास का हवाला देकर साल में दो बार पानी पिलाने की विनती की, जिसे माता ने स्वीकार कर लिया। माना जाता है तभी से यह परंपरा शुरू हुई।

माता के भोग के बाद भर जाता है घड़ा

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब इस घड़े को बंद करने की बारी आती है तब शीतला माता के चरणों से लगाकर दूध का भोग घड़े को लगाया जाता है और इसके बाद घड़ा पूरा भर जाता है। यह घटना श्रद्धालुओं के लिए चमत्कार से कम नहीं मानी जाती और उनकी आस्था को और मजबूत करती है। इस अनोखी घटना को लेकर स्थानीय स्तर पर जांच-पड़ताल भी हुई, लेकिन कोई ठोस वैज्ञानिक निष्कर्ष सामने नहीं आ पाया है।

भक्त का विश्वास: 'मां पर आस्था है, वो हर वक्त साथ हैं'

भाटुंद गांव के रहने वाले श्रद्धालु चिराग औदीच्य बताते है कि यह परंपरा को सिर्फ एक रहस्य नहीं, बल्कि गहरी आस्था का प्रतीक हैं। उनका कहना है कि वे बचपन से इस अनोखी परंपरा को देखते आ रहे हैं और उनके लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिराग आगे बताते हैं कि, 'हमारे लिए ये सिर्फ घड़ा या पानी भरने की परंपरा नहीं है, ये हमारी मां शीतला पर विश्वास का प्रतीक है। हमने हमेशा सुना और देखा है कि मां अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।'

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