‘प्रोत्साहन से प्रतिभाओं को मिलता है संबल’
बांसवाड़ा. पंचाल समाज चौदह चोखरा के दो दिवसीय प्रतिभा सम्मान और खेलकूद प्रतियोगिता का समापन सोमवार को मेधावी प्रतिभाओं को लक्ष्य तय कर आगे बढऩे की प्रेरणा देने के साथ हुआ। खांदू कॉलोनी स्थित राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेल मैदान में बांसवाड़ा बचोखरा के संयोजन में सोमवार सुबह के सत्र में आशुभाषण प्रतियोगिता, सुगम संगीत कार्यक्रम हुआ। वहीं वॉलीबाल, बैडमिंटन और कबड्डी के खिताबी मुकाबले खेले गए।
प्रथम सत्र के मुख्य अतिथि गंगाराम पंचाल नादिया रहे। अध्यक्षता अंबालाल पंचाल पांचलवासा ने की। कचराभाई पंचाल, शांतिलाल मईयोड, जगदीश बेताली, अंबालाल पारसोला, शंकरलाल खडक़, शंकरलाल सागवाड़ा, कन्हैयालाल पारसोला, मोहनलाल लोहारिया, कुंदनभाई टामटिया, अंबालाल घाटोल, हीरालाल, रामचंद्र पंचाल, जीवतराम लोहारिया, लक्ष्मीचंद भीलूड़ा, जगदीश पंचाल देवल, वेलजी भाई रैयाणा, कांतिलाल छोटा डूंगरा विशिष्ट अतिथि रहे।
प्रोत्साहन आवश्यक
इस अवसर पर अतिथियों ने कहा कि प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने से ही जीवन में आगे बढऩे की राह प्रशस्त होती है। सामाजिक विकास के लिए शिक्षा को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने उच्च शिक्षा के प्रति जागरूकता लाने की बात कही। उन्होंने ऐसे आयोजनों को समाज की भावी पीढ़ी के लिए भी प्रेरणादायक बताया। अतिथियों का मेजबान चौखरा अध्यक्ष हरीश पंचाल, विनोद पंचाल, हीरालाल भूंगड़ा, दिनेश, मदनलाल पंचाल, मणिलाल पंचाल सहित ट्रस्ट मंडल के अशोक पंचाल और समाज के पूर्व अध्यक्षों ने स्वागत किया। इस अवसर पर शहीद हर्षित भदोरिया की माता का सम्मान किया गया। सुरेंद्र पंचाल ने प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। संचालन महेश, पंकज और रामचंद्र पंचाल ने संयुक्त रूप से किया।
सात सौ प्रतिभाओं का सम्मान
समारोह के दूसरे सत्र में समाज की करीब सात सौ शैक्षणिक, सह शैक्षणिक व अन्य प्रतिभाओं का सम्मान किया गया। इस सत्र के अतिथि चौदह चोखरा अध्यक्ष अशोक पंचाल, गंगाराम पंचाल, प्रताप जी मुंगेड़, राजेंद्र पंचाल घाटोल, भंवरलाल परतापुर, कारीलाल डूंगरपुर, देवीलाल पारसोला, तोलाचंद बांसवाड़ा, हरीश पंचाल, मगनलाल चौरासी, प्रेमचंद, बसंतलाल काकनवाड़ी, कारूजी, गणेशलाल गांगड़तलाई व निकुंज मोहन पण्ड्या रहे।
यह रहे विजेता
जनरल रेफरी रमणलाल पंचाल ने बताया कि वॉलीबाल में लोहारिया व परतापुर, बैडमिंटन में लोहारिया व बोरी, कबड्ड़ी में खमेरा और पथोक की टीमें विजेता और उप विजेता रही। आशुभाषण में विरल बोरी, जीनू नन्दौड़ तथा सुगम संगीत में जयदीप गोवाड़ी और विवेक बड़ोदिया प्रथम व द्वितीय रहे।