बांसवाड़ा

Banswara Accident Update : स्कूल और घर में सभी का लाड़ला था हयान, छुट्टियों में लद्दाख घुमाकर लाए थे पिता

Banswara Accident Update : बांसवाड़ा में स्कूल वैन हादसे में सिर्फ एक परिवार का बेटा नहीं छीना, बल्कि मां-बाप का लाड़ला, गुरुजनों का प्रिय शिष्य और स्कूल व कॉलोनी के बच्चों ने अपना साथी खो दिया।
2 min read
Banswara Accident Update
माता-पिता के साथ हयान। फोटो पत्रिका नेटवर्क

बांसवाड़ा। स्कूल वैन हादसे में सिर्फ एक परिवार का बेटा नहीं छीना, बल्कि मां-बाप का लाड़ला, गुरुजनों का प्रिय शिष्य और स्कूल व कॉलोनी के बच्चों ने अपना साथी खो दिया। हयान की मौत की खबर सुनते ही उसके साथी भी परेशान हो गए।

डॉ. राजेश वसानिया आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। हयान इनका छोटा बेटा था और वर्तमान में वह दसवीं कक्षा में पढ़ रहा था। हयान घर में मां-बाप का लाड़ला होने के साथ ही स्कूल में भी सबका प्रिय था। स्कूल की हर एक्टिविटी से लेकर पढ़ाई में भी वह अव्वल था। स्कूल के शिक्षकों ने बताया कि वह हैंडबॉल का राज्य स्तरीय प्लेयर था और क्लास में भी अव्वल रहता था। खेल और पढ़ाई के साथ ही उसे म्यूजिक का शौक था और विद्यालय की प्रार्थना सभा में म्यूजिक भी वह बजाता था।

छुट्टियों में लद्दाख घुमाकर लाए थे पिता

परिजनों ने बताया कि घर का लाड़ला होने के कारण हाल ही गर्मियों की छुट्टियों में माता-पिता उसे लेह-लद्दाख घुमा कर लाए थे। इसके बाद हयान ने अपनी इंस्टाग्राम आईडी बना ली थी। हादसे के बाद माता-पिता सदमे में दिखे। जिला अस्पताल में भी उपचार के दौरान पिता डॉ. राजेश दोनों हाथ जोड़कर ईश्वर से प्रार्थना करते नजर आए। डॉ. राजेश वसानिया आयुर्वेदिक डॉक्टर हैं। हयान छोटा बेटा था। बड़ा बेटा पुणे की किसी कंपनी में काम करता है। हादसे के समय वह वियतनाम में था। सूचना पाते ही वह भी फ्लाइट से रवाना हो गया।

बैठे बच्चों ने बताई आपबीती

वैन से हुए हादसे के बाद कक्षा छह में पढ़ रहे यज्ञ पुत्र दीप दोसी ने बताया कि वह और उसका भाई ध्रुविन रोज की तरह ही तैयार होकर स्कूल वैन का इंतजार कर रहे थे। गुरु पूर्णिमा होने के कारण हमने टीचर्स के लिए पैन और फ्लावर भी बैग में ले रखे थे। कुछ ही देर में वैन लेकर नीतिन भईया (वैन ड्राईवर) आए और हम वैन में बैठ गए। वैन में आगे ड्राईवर अंकल के पास हयन भईया रोज की तरह ही गाड़ी में आगे ही बैठे थे।

हम सभी पीछे बैठे थे और स्कूल की बाते कर रहे थे। वैन रोज की तरह ही अलग-अलग जगहों से बच्चे ले रही थी। पर, नीतिन भईया रोज की तरह ही बहुत तेज स्पीड में गाड़ी चला रहे थे। गाड़ी की स्पीड खड्ढ़ों एवं टर्न पर भी कम नहीं हो रही थी। हमने नीतिन भईया को बोला भी कि गाड़ी कम स्पीड में चलाओ। पर, वह रोज की तरह ही तेज स्पीड में गाड़ी चला रहे थे। हम रोज बोलते थे। पर, वह रोज इसी तरह स्पीड में चलाते थे। इसके बाद अचानक तेज आवाज आई और पूरा अंधेरा छा गया। इसके बाद क्या हुआ हमे कुछ पता नहीं चला।

Updated on:
30 Jul 2026 05:05 pm
Published on:
30 Jul 2026 05:05 pm