
सागवाड़ा. वैज्ञानिक धर्माचार्य कनक नंदी ससंघ के सान्निध्य में वीर शासन जयंती का पर्व श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया।
कार्यक्रम की शुरुआत भगवान महावीर के अभिषेक एवं पूजन के साथ हुई। इसके पश्चात समाजजनों ने आचार्य का पाद प्रक्षालन किया। आचार्य कनक नंदी ने प्रवचन में बताया कि आज के ही दिन भगवान महावीर को केवल ज्ञान प्राप्त होने के 66 दिन बाद प्रथम दिव्य देशना हुई थी। केवल ज्ञान होने के बाद भी योग्य शिष्य के अभाव में दिव्य ध्वनि नहीं खिर रही थी। इससे देव भी चिंतित हो गए। इंद्रभुति गौतम ब्राह्मण जो अपने 500 शिष्यों को पढ़ाते थे, देव के पूछने पर उत्तर नहीं दे पाए। देव उन्हें भगवान के समवशरण में ले गए। वहां मानस्तंभ को देखकर उनका मान गलित हो गया और वे भगवान के चरणों में नतमस्तक हो गए। प्रश्नों का समाधान पाकर वे गौतम गौतम गणधर बन गए और समवशरण में गणधरों में प्रमुख स्थान प्राप्त किया। एकम के दिन भगवान की प्रथम दिव्य देशना हुई। उसी दिन से वीर शासन जयंती के रूप में मनाया जाता है। प्रवचन में गणधर भगवंतों के 60 हजार प्रश्नों और भगवान द्वारा उनके समाधान का उल्लेख किया गया।
मुनि सुविज्ञसागर ने आत्मा के स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा जिस प्रकार दीपक स्वयं प्रकाशित होकर दूसरों को भी प्रकाश देता है, उसी प्रकार आत्मा भी स्व पर प्रकाशी है। ज्ञान गुण के द्वारा वह स्वयं को भी जानता है और दूसरों को भी। केवल ज्ञान के बाद भगवान को किसी अवलंबन की आवश्यकता नहीं होती। मंगलाचरण मुनि सुविज्ञसागर की ओर से आचार्य द्वारा रचित कविता ‘तू ही तेरा कर्ता भोक्ता, तू ही तेरा हर्ता है। तू ही तेरा शत्रु मित्र, तू ही तेरा सत्य है’ से किया गया। बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहकर धर्मलाभ लिया।