बांसवाड़ा

Rajasthan : होर्मुज स्ट्रेट विवाद से बांसवाड़ा प्रभावित, सिरेमिक-टाइल्स कारखाने की स्लरी की मांग घटी

Rajasthan : होर्मुज स्ट्रेट विवाद के चलते अब गैस की कमी से बांसवाड़ा भी प्रभावित हो रहा है। जिले के सिरेमिक और टाइल्स कारखानों से निकलने वाली स्लरी की खरीद-फरोख्त काफी कम हो गई है। पढ़ें पूरी स्टोरी।
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Hormuz Strait dispute Banswara affected ceramic-tile factory slurry demand reduces
बांसवाड़ा. ठीकरिया औद्योगिक क्षेत्र में एक मार्बल इकाई में स्लरी का लगा ढेर। फोटो प​त्रिका

Rajasthan : मिडिल ईस्ट में ईरान-अमरीका के बीच चल रहे संघर्ष एवं होर्मुज स्ट्रेट विवाद के चलते अब गैस की कमी से कारखानों पर भी असर दिखने लगा है। इसके चलते सैकड़ों सिरेमिक व टाइल्स कारखानों में स्लरी की खरीद-फरोख्त काफी कम हो गई है। इसका असर जिले में चल रही मार्बल इकाइयों पर पड़ रहा है। जिले की कुछ मार्बल इकाइयों से जा रहा स्लरी उत्पादन गुजरात के मोरबी की सिरेमिक और टाइल्स कारखानों में उपयोग में आ रहा है। गैस की कमी से इन प्लांटों में भी उत्पादन कम हो गया है।

आर्टिफिशियल टाइल्सों का निर्माण धीमा पड़ने से मार्बल इकाइयों से निकलने वाली स्लरी की खरीद भी कम हो रही है। कोई खरीदार न होने की वजह से स्टोन कटिंग और प्रोसेस यूनिट्स इसे खाली पड़े खेतों और प्लॉटों में डंप करने को मजबूर हैं।

व्यापारियों का कहना है कि जब स्लरी निकलती है तो यह गीली होती है। इसे सूखने में ही आठ माह लग जाते हैं। इसलिए वे गीली स्लरी को ही टैंकरों के माध्यम से भरवाकर दूर फिंकवा देते हैं। ऐसे में पर्यावरण और स्थानीय जमीन के खराब होने की समस्या भी पैदा हो रही है।

कई उद्योगों में काम आती है स्लरी

स्लरी का उपयोग वाशिंग पाऊडर, पेपर, कांच, प्लास्टिक आदि उत्पादों सहित कैल्शियम के बतौर भी होता है। टाइल्स कारखानों में यह स्लरी आर्टिफिशियल टाइल्स के निर्माण में एवं सिरेमिक उद्योग में इससे सैनिटरी वेयर, क्रॉकरी (बर्तन) के निर्माण के उपयोग में लिया जाता है। प्लास्टिक से बने उत्पाद में स्लरी के उपयोग से उत्पादों को मजबूती मिलती हैै।

नहीं है डंप करने की व्यवस्था

रीको की ओर से मार्बल इकाइयों से निकलने वाली स्लरी को डंप करने की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में अधिकतर उद्योग इसे अपने खाली पड़े प्लॉटों अथवा खेतों में डाल रहे हैं। इससे यह सूखने पर धूल की तरह उड़ रही है और लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित कर रही है।

आंकड़ों पर एक नजर

1 लाख 33 हजार टन के करीब जिले में मार्बल और पत्थर का उत्पादन।
1 हजार टन से अधिक स्लरी का उत्पादन स्टोन कटिंग और प्रोसेस यूनिटस से।
25 से 30 इकाइयां हैं स्टोन कटिंग और प्रोसेस यूनिटस की जिले में।

Updated on:
18 May 2026 08:44 am
Published on:
18 May 2026 08:44 am