
Banswara School Van Accident: राजस्थान के बांसवाड़ा शहर के ठीकरिया क्षेत्र से बुधवार सुबह एक हृदय विदारक सड़क हादसा सामने आया। रोजाना की तरह सुबह-सुबह हंसते-खेलते स्कूल जा रहे बच्चों से भरी सेंट पॉल स्कूल की एक प्राइवेट वैन सड़क किनारे खड़े एक ट्रक से जा टकराई। टक्कर इतनी भीषण थी कि वैन का अगला हिस्सा पूरी तरह चकनाचूर हो गया। इस दर्दनाक हादसे में एक स्कूली बच्चे की जान चली गई, जबकि आधे दर्जन से अधिक बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
जानकारी के अनुसार, वैन में सवार बच्चे जानामेड़ी, बाहुबली कॉलोनी और हाउसिंग बोर्ड क्षेत्र के रहने वाले हैं। सुबह के समय वैन चालक बच्चों को लेकर सेंट पॉल स्कूल की ओर जा रहा था। जैसे ही वैन ठीकरिया क्षेत्र में पहुंची, अचानक असंतुलित होकर सड़क किनारे खड़े एक ट्रक में पीछे से जोरदार तरीके से जा घुसी।
टक्कर होते ही वैन में सवार मासूम बच्चों में चीख-पुकार मच गई। दुर्घटना का दृश्य इतना भयावह था कि वैन का अगला हिस्सा बुरी तरह से पिचक गया और उसमें बच्चे फंस गए। चीख-पुकार सुनकर आसपास से गुजर रहे ग्रामीण और राहगीर तुरंत मदद के लिए दौड़े। स्थानीय लोगों ने मुस्तैदी दिखाते हुए वैन की खिड़कियों और मलबे में फंसे बच्चों को जैसे-तैसे बाहर निकाला।
हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस ने स्थानीय नागरिकों के सहयोग से बिना समय गंवाए सभी घायल बच्चों को एम्बुलेंस व निजी वाहनों की मदद से जिला अस्पताल पहुंचाया। अस्पताल प्रशासन को भी अलर्ट पर रखा गया, ताकि बच्चों को तुरंत आपातकालीन चिकित्सा मिल सके।
दुर्घटना में जान गंवाने वाले मासूम की पहचान हाउसिंग बोर्ड निवासी हयन बसानिया पुत्र डॉ. राजेंद्र बसानिया के रूप में हुई है। वहीं, हादसे में रुद्र नेमा पुत्र रंजन नेमा गंभीर रूप से घायल है, जिसका इलाज उदयपुर अस्पताल के आईसीयू में चल रहा है। हादसे में वैन का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त होने से हयन को सिर और छाती में गंभीर चोटें आईं, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, रुद्र के पैर और सिर में गंभीर चोटें आई थीं। जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद उसकी नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तत्काल उदयपुर के बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया।
प्रत्यक्षदर्शियों और शुरुआती जानकारी के अनुसार, हादसा स्कूल पहुंचने की जल्दबाजी के चक्कर में हुआ। अक्सर स्कूलों में देरी से पहुंचने पर बच्चों को कड़ी सजा या डांट का डर रहता है, जिसके कारण चालक भी तेज रफ्तार में गाड़ियां दौड़ाते हैं। इस खौफ और आपाधापी के चक्कर में मासूमों की जिंदगी दांव पर लग गई।
हादसे की खबर जैसे ही सेंट पॉल स्कूल और अन्य शैक्षणिक संस्थानों में पहुंची, वहां सन्नाटा पसर गया। अपने सहपाठी की मौत की खबर सुनते ही स्कूल के कई अन्य बच्चों की तबीयत बिगड़ने लगी। घबराए परिजनों ने आनन-फानन में अपने बच्चों की छुट्टी करा ली और उन्हें घर ले गए।
हादसे की खबर पूरे शहर में फैल गई। जिला अस्पताल के बाहर सैकड़ों की संख्या में परिजनों, रिश्तेदारों और आम नागरिकों का जमावड़ा लग गया। हर तरफ रोने-बिलखने की आवाजें आ रही थीं और माहौल बेहद गमगीन हो गया। हादसे का असर शहर के सामाजिक कार्यक्रमों पर भी पड़ा। शहर के प्रसिद्ध आजाद चौक में गुरुपूर्णिमा के अवसर पर आयोजित होने वाले भव्य कार्यक्रम को आयोजकों ने हादसे की संवेदनशीलता को देखते हुए जल्दबाजी में संक्षिप्त रूप से संपन्न कर दिया।
पुलिस ने खड़े ट्रक और क्षतिग्रस्त वैन को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस इस बात की पड़ताल कर रही है कि वैन की रफ्तार कितनी थी, क्या चालक की कोई लापरवाही थी, और क्या वैन में क्षमता से अधिक बच्चे बिठाए गए थे। इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर स्कूली वाहनों की सुरक्षा, तेज रफ्तार और परिवहन नियमों की अनदेखी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।