Banswara News : राजस्थान केबिनेट की शनिवार को हुई बैठक के निर्णय ने बांसवाड़ा को संभाग से फिर जिला मुख्यालय तक सीमित कर दिया। इस सूचना के बाद पूरे इलाके में मायूसी छाई है।
Banswara News : राजस्थान केबिनेट की शनिवार को हुई बैठक के निर्णय ने बांसवाड़ा को फिर संभाग से जिला मुख्यालय तक सीमित कर दिया। 511 दिन… यानी 1 साल 4 माह 23 दिन के छोटे से वक्त में अभी प्रशासनिक ढांचा बनने में ही लगा था कि उसके पैरों तले जमीन खींच ली गई। डूंगरपुर और प्रतापगढ़ जिले को जोड़कर बांसवाड़ा संभागीय मुख्यालय बनाते हुए पिछली सरकार के विकास के नए आयाम स्थापित करने के सब्जबाग काफूर हो गए। सरकार के निर्णय की खबर मिलते ही क्षेत्र में शनिवार शाम को प्रतिक्रियाओं का दौर तेजी से चला। सोशल मीडिया पर किसी ने इसे पूरी तरह गलत करार दिया तो किसी ने बिना आधारभूत सुविधाओं और अधूरे प्रशासनिक तंत्र के काम चलाउ हालत को देखते हुए इसे सही भी बताया। इधर डूंगरपुर जिले के लिए यह फैसला उचित बताया जा रहा है। उदयपुर तक आने-जाने में ज्यादा सहूलियतें होने से लोगों को राहत मिलेगी। वहीं प्रतापगढ़ जिले के लोगों पर मिलाजुला असर होगा।
5 अगस्त 2023 को प्रदेश में सीकर और पाली के साथ बांसवाड़ा नया संभाग गठित कर अधिसूचना जारी हुई। गजट नोटिफिकेशन 5 अगस्त 2023 को हुआ। अगले ही दिन से अधिसूचना प्रभावी हुई। यहां पहले संभागीय आयुक्त डॉ. नीरज के पवन अगस्त में ही नियुक्त किए गए। सितंबर,2023 में उन्होंने जिम्मा संभाला। इसके बाद ठीक एक साल बाद सितंबर,2024 में ही आईएएस पवन का तबादला हुआ। फिर बांसवाड़ा का अतिरिक्त जिम्मा टीएडी आयुक्त, उदयपुर प्रज्ञा केवलरमानी को सौंपा गया। तब से वे ही कार्यभार देख रही हैं।
1- बांसवाड़ा के अधिकारियों-कार्मिकों और आम लोगों को 165 किमी दूर संभाग मुख्यालय जाना पड़ेगा।
2- प्रतापगढ़ वासियों को भी करीब 157 किमी का सफर करने की मजबूरी रहेगी।
3- डूंगरपुर शहर के लिए बांसवाड़ा और उदयपुर की दूरी करीब 100 किमी ही होने और उधर सुगम नेशनल हाईवे होने से निर्णय कुछ अनुकूल रहेगा। गुजरात के सीमावर्ती सीमलवाड़ा, धंबोला सरीखे इलाकों के लोगों के लिए दौड़भाग बढ़ेगी।
बीते सवा साल में बांसवाड़ा संभाग मुख्यालय का अपना दफ्तर तक नहीं बन पाया। शुरुआत से ही यह कलेक्ट्री परिसर में टीएडी के भवन में संचालित हुआ, जहां इससे पहले जीजीटीयू का प्रशासनिक भवन चल रहा था। जीजीटीयू का अपना भवन बनने के बाद खाली परिसर आयुक्त और आईजी कार्यालय बनाया गया जो अब तक संचालित है।
मुख्यमंत्री ने आर्थिक स्थितियों को देखकर निर्णय किया है तो सोच-समझकर ही किया होगा। वैसे आम जनता का तो कोई संभाग मुख्यालय पर काम पड़ता नहीं है। मुख्यालय पर जनप्रतिनिधि का हम कराएंगे, भले उदयपुर जाना पड़े या जयपुर।
कैलाश मीणा विधायक गढ़ी