बांसवाड़ा में CM भजनलाल शर्मा का बड़ा एक्शन, मॉर्निंग वॉक के दौरान रो पड़ी मां, सेरेब्रल पाल्सी पीड़ित बच्चे की मजबूरी देख मुख्यमंत्री ने ऑन-द-स्पॉट कराया पति का ट्रांसफर।
राजस्थान में तबादलों के लिए अमूमन सरकारी दफ्तरों के महीनों चक्कर काटने पड़ते हैं, लेकिन जब सूबे की कमान सीधे जनता के बीच रहने वाले संवेदनशील मुखिया के हाथों में हो, तो नियम और फाइलें भी मानवीय संवेदनाओं के आगे घुटने टेक देती हैं। कुछ ऐसा ही वाकया राजस्थान के आदिवासी बहुल बांसवाड़ा जिले की ग्राम पंचायत चुड़ादा में देखने को मिला, जिसने यह साबित कर दिया कि भजनलाल सरकार के सुशासन में आम आदमी की सुनवाई सिर्फ बंद कमरों या सचिवालय की फाइलों में नहीं, बल्कि सीधे जमीन पर होती है।
बांसवाड़ा के दौरे पर आए मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा अपनी तय दिनचर्या के अनुसार सुबह-सुबह ग्रामीण इलाकों की जमीनी हकीकत जानने और स्थानीय लोगों से संवाद करने के लिए मॉर्निंग वॉक पर निकले थे। तभी अचानक उनके सामने अपने बच्चे की जिंदगी के लिए संघर्ष कर रही एक बेबस मां आ खड़ी हुई और उसने मुख्यमंत्री के कदमों को रोक दिया।
मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जब मॉर्निंग वॉक में ग्रामीणों से हाथ मिलाते हुए आगे बढ़ रहे थे, तभी बागावास और बांसवाड़ा अंचल की रहने वाली रोशनी कलाल अपने आंसू रोक नहीं पाईं। उन्होंने मुख्यमंत्री के पास पहुंचकर अपने परिवार की उस भयानक परिस्थिति का जिक्र किया जिससे वे पिछले कई सालों से जूझ रही हैं।
रोशनी ने रोते हुए मुख्यमंत्री को बताया कि उनका मासूम पुत्र 'सेरेब्रल पाल्सी' (Cerebral Palsy) नाम की एक अत्यंत गंभीर और जानलेवा दिमागी बीमारी से पीड़ित है। इस बीमारी में बच्चे का अपने शरीर और मांसपेशियों पर कोई नियंत्रण नहीं रहता और उसे 24 घंटे विशेष देखभाल व थैरेपी की जरूरत होती है।
अकेली मां का संघर्ष: रोशनी कलाल के पति हेमेंद्र कुमार कलाल जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) में सहायक अभियंता (Assistant Engineer) के पद पर कार्यरत हैं, लेकिन उनकी पोस्टिंग बांसवाड़ा से दूर डूंगरपुर जिले के सागवाड़ा में थी। पति के दूर होने के कारण रोशनी को अकेले ही बीमार बच्चे को संभालना, उसे अस्पताल ले जाना और घर की जिम्मेदारी उठाना बेहद मुश्किल हो रहा था।
एक मां की आँखों में छिपे दर्द और बच्चे की गंभीर बीमारी की बात सुनते ही मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का दिल पसीज गया। उन्होंने न केवल महिला को ढांढस बंधाया, बल्कि प्रशासनिक औपचारिकता के लंबे रास्तों को दरकिनार करते हुए तुरंत एक्शन मोड संभाल लिया।
स्पॉट निर्देश (Spot Instructions): मुख्यमंत्री ने बिना एक पल गंवाए अपने साथ चल रहे प्रशासनिक अमले और संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को मौके पर ही तलब किया।
डूंगरपुर से बांसवाड़ा ट्रांसफर: उन्होंने महिला के पति हेमेंद्र कुमार कलाल (सहायक अभियंता) का पदस्थापन तुरंत प्रभाव से जनस्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग कार्यालय सागवाड़ा (डूंगरपुर) से बदलकर 'कार्यालय अधिशासी अभियंता परियोजना खंड बांसवाड़ा' में करने के कड़े निर्देश दिए।
सुशासन की सुपरफास्ट स्पीड: मुख्यमंत्री के निर्देश मिलते ही सचिवालय और पीएचईडी विभाग का प्रशासनिक तंत्र पूरी तरह सक्रिय हो गया। आमतौर पर जिस ट्रांसफर आर्डर को जारी होने में हफ़्तों लग जाते हैं, वह मुख्यमंत्री की इच्छाशक्ति के कारण महज कुछ ही घंटों के भीतर आधिकारिक रूप से टाइप होकर जारी हो गया और उसकी कॉपी पीड़ित परिवार तक पहुंचा दी गई।
यह समझना बेहद जरूरी है कि आखिर रोशनी कलाल के लिए अपने पति का साथ होना इतना अनिवार्य क्यों था और मुख्यमंत्री ने इस पर इतनी त्वरित संवेदनशीलता क्यों दिखाई।
| मेडिकल फैक्ट्स (Medical Aspects) | मरीज की शारीरिक स्थिति (Patient Condition) | परिवार को सहायता की आवश्यकता (Family Support Needs) |
| मोटर न्यूरॉन डैमेज | बच्चे के हाथ-पैर पूरी तरह काम नहीं करते, चलने-फिरने में असमर्थता। | बच्चे को उठाने, बिठाने और दैनिक कार्यों के लिए हर समय एक पुरुष/मजबूत सहारे की जरूरत। |
| नियमित फिजियोथैरेपी | हर हफ्ते कई बार बड़े अस्पतालों में थैरेपी सेशंस के लिए जाना होता है। | मां के लिए अकेले बीमार बच्चे को लेकर दूसरे शहर या अस्पताल जाना व्यावहारिक रूप से असंभव। |
| मानसिक तनाव | परिवार लगातार मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजरता है। | पति-पत्नी का एक साथ रहना बच्चे के मानसिक विकास और मनोबल के लिए सबसे बड़ा संबल। |
पति के ट्रांसफर के आधिकारिक आदेश हाथ में आने के बाद रोशनी कलाल और उनके पूरे परिवार की आँखों में खुशी के आंसू थे। उन्होंने हाथ जोड़कर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का धन्यवाद ज्ञापित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री जी हमारे लिए भगवान का रूप बनकर आए और उन्होंने मेरे बीमार बच्चे की पुकार सुन ली।