
बांसवाड़ा. चुनाव में जीत का अंतर एक वोट का हो हजारों का, जीतना महत्वपूर्ण होता है। प्रदेश में नाथद्वारा विधानसभा सीट पर कांगे्रस के सीपी जोशी और भारतीय जनता पार्टी के कल्याणसिंह के बीच जीत-हार का अंतर एक वोट का रहा और यह देश-प्रदेश में चर्चा का विषय रहा। जहां तक बांसवाड़ा जिले का मामला है, पहले चुनाव से लेकर 2013 तक हुए चुनाव में अब तक मात्र एक सीट पर एक प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित हुआ है। प्रदेश में हुए पहले चुनाव में बागीदौरा सीट से आईएनसी के हरिराम को निर्विरोध निर्वाचित घोषित किया गया था। वहीं कुशलगढ़ सीट से हीराभाई न्यूनतम अंतर से और बागीदौरा सीट से महेंद्रजीतसिंह मालवीया सर्वाधिक वोटों के अंतर से जीते हैं।
चुनावी आंकड़ों को खंगालने पर सामने आया कि वर्ष 1967 में कुशलगढ़ विधानसभा सीट पर एसएसपी के हीरा ने अपने निकटतम प्रत्याशी आईएनसी के वरसिंह को मात्र 93 वोटों के अंतर से हराया था। इस चुनाव में कुल 60 हजार 276 मतदाता थे और 46 हजार 166 मतदाताओं ने वोट डाले थे। मतदान का प्रतिशत 76.59 रहा था। इसमें वैध मतों की संख्या 44 हजार 205 थी। चुनाव मैदान में तीन प्रत्याशी थे। एसएसपी से हीरा, आईएनसी से वरसिंह के अलावा भीमा ने बतौर निर्दलीय चुनावी भाग्य आजमाया था। इसमें हीरा को 21 हजार 662 वोट मिले थे, वहीं वरसिंह को 21 हजार 569 तथा भीमा को 974 वोट प्राप्त हुए थे। इस सीट पर हुए चुनाव में प्राप्त मतों में प्रतिशत का अंतर भी महज 0. 21 रहा।
कायम है रिकार्ड
जिले में सर्वाधिक वोटों के अंतर से जीत का रिकार्ड कांगे्रस के महेंद्रजीतसिंह मालवीया के नाम पर है। मालवीया ने वर्ष 2008 में हुए विधानसभा चुनाव में बागीदौरा सीट से सर्वाधिक 44 हजार 689 मतों के अंतर से जीत हासिल की थी। इस चुनाव में पांच प्रत्याशी चुनाव मैदान में थे। कुल एक लाख 72 हजार 955 मतदाताओं में से एक लाख 19 हजार 906 मतदाताओं ने अपने मताधिकार का उपयोग किया था। इसमें कांगे्रस के महेंद्रजीतसिंह मालवीया को 76 हजार 113 वोट मिले थे, वहीं जनता दल एकीकृत के प्रत्याशी जीतमल खांट को 31 हजार 424 वोट मिल पाए थे। अन्य प्रत्याशियों में निर्दलीय प्रो. मोहनलाल डामोर को 5792, बसपा के मोहनलाल को 4564 तथा एसपी के कलसिंह मकवाना को 2013 वोट मिले थे।