अपने जवाब गलत होने का अंदाजा लगते ही मंत्री जी ने इसमें सुधार करते हुए कहा कि...
बाराबंकी. बाढ़ एक ऐसी आपदा है जो हर साल जिले में तबाही लेकर आती है। न जाने कितनी जनहानि, कितने पशुओं के जानमाल का नुकसान और कितनी फसलें बाढ़ में समा जाती हैं। हर साल आने वाली बाढ़ से स्थायी समाधान के चर्चे खूब होते हैं। घोटाले भी खूब होते हैं, लेकिन आज तक स्थायी समाधान सम्भव नहीं हो पाया है। यही सवाल जब उत्तर प्रदेश की बाढ़ नियन्त्रण मन्त्री से पूछा गया तो उनका जवाब लगभग हाथ खड़े कर देने वाला था। मन्त्री ने कहा कि यह दैवीय आपदा है। इसका स्थायी समाधान कैसा? मगर हम कोशिश कर रहे हैं। मन्त्री का यह बयान उन बाढ़ पीड़ितों में निराशा पैदा करने वाला है जो स्थायी समाधान की बाट जोह रहे हैं।
बाराबंकी जनपद में आज मुख्यालय स्थित फल एवं सब्ज़ी मंडी का निरीक्षण करने प्रदेश सरकार की मन्त्री स्वाति सिंह पहुंची। व्यापारियों ने अपनी समस्याओं से मन्त्री को अवगत कराया और मन्त्री ने उनकी इस समस्या का शीघ्र निस्तारण का भरोसा दिलाया। इस दौरान मन्त्री ने मीडिया से भी वार्ता की।
प्रेसवार्ता में बोलीं मंत्री स्वाति सिंह
वार्ता के दौरान जब जनपद से होकर गुजरने वाली घाघरा नदी में हर साल आने वाली बाढ़ के स्थायी समाधान के सम्बन्ध में पूछा गया तो मन्त्री जी का बयान हैरान कर देने वाला था। मन्त्री स्वाति सिंह ने स्थायी समाधान के सवाल पर उल्टा सवाल करते हुए कहा कि यह तो दैवीय आपदा है, भला इसका स्थायी समाधान कैसे हो सकता है? जैसे भूकम्प आता है तो भूकम्प एक दैवीय आपदा है इसका स्थायी समाधान क्या होगा? अपने जवाब गलत होने का अंदाजा लगते ही उन्होंने इसमें सुधार करते हुए कहा कि फिर भी हम कोशिश कर रहे हैं। बाढ़ के पानी को कहां ले जाया जा सकता है और जब पानी को कमी होती है तो इसका सदुपयोग कैसे हो सकता है? इन सब बातों को धयान में रख कर योजना के क्रियान्वयन पर कोशिश हो रही है और गम्भीरता से विचार हो रहा है, मगर इसमें काफी समय लगेगा।
बाढ़ पीड़ितों में निराशा
मन्त्री स्वाति सिंह के इस बयान से जहां उन बाढ़ पीड़ितों की उम्मीदों को झटका लगा है, जो बाढ़ से स्थायी समाधान की अब तक राह देख रहे हैं। वहीं मन्त्री के इस संवेदनशील मुद्दे पर ऐसे बचकाने बयान ने विरोधी दलों को बैठे बिठाये एक मुद्दा दे दिया है।