बाराबंकी

‘कांग्रेस ने बिगाड़ा देश का माहौल’, समाजवादी चिंतक राजनाथ शर्मा ने दिया बड़ा बयान; CM योगी को लेकर जानिए क्या बोले?

UP News: वरिष्ठ समाजवादी चिंतक पंडित राजनाथ शर्मा ने देश के मौजूदा हालात और जेपी आंदोलन को लेकर बड़ा बयान दिया है। साथ ही उन्होंने देश का माहौल बिगाड़ने के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया। जानिए क्या कहा...
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Oct 09, 2026
Rajnath Sharma, Congress, CM Yogi, UP Politics
वरिष्ठ समाजवादी चिंतक पंडित राजनाथ शर्मा (PC: IANS)

UP Politics News:उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ समाजवादी चिंतक और डॉ. राममनोहर लोहिया के निकट सहयोगी रहे पंडित राजनाथ शर्मा ने देश के सियासी हालात इतिहास और संपूर्ण क्रांति को लेकर बेबाक राय रखी है। उन्होंने देश के बंटवारे से लेकर मौजूदा राजनीति तक पर खुलकर बात की। राजनाथ शर्मा ने देश का माहौल बिगाड़ने के लिए मुख्य रूप से कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है और मौजूदा सियासत पर भी प्रतिक्रिया दी है। पंडित राजनाथ ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सहित कुछ नेताओं की राजनीति पर भी सवाल उठाए। विस्तार से जानिए उन्होंने देश की मौजूदा राजनीति को लेकर क्या-कुछ कहा।

'मंदिर-मस्जिद और पाकिस्तान पर होती है राजनीति'

पंडित राजनाथ शर्मा ने कहा कि, "लोगों के बीच अब एक अलग धारणा बन गई है। पाकिस्तान के बंटवारे के बाद एक परिसंघ बनाने का विचार सामने आया था लेकिन जवाहरलाल नेहरू और कांग्रेस इसके लिए राजी नहीं हुए। महात्मा गांधी का मानना था कि एक ढीला परिसंघ बनना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि मुसलमानों के प्रति दुर्भावना पैदा करके और बार-बार पाकिस्तान का नाम लेकर शासन करने का तरीका अपनाया गया। राजनीति में कभी मंदिर तो कभी मस्जिद की बात होती है। योगी जी जैसे नेता सोचते हैं कि वे अपने हितों को साध रहे हैं। शर्मा ने साफ कहा कि देश का माहौल खराब करने के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदार कांग्रेस ही है।"

लोहिया और जेपी नारायण के रिश्तों पर कही ये बात

दिग्गज समाजवादी नेता ने संपूर्ण क्रांति को लेकर भी कई ऐतिहासिक बातें साझा की। उन्होंने बताया कि जयप्रकाश नारायण का डाक्टर राम मनोहर लोहिया की राजनीतिक परंपरा से ज्यादा जुड़ाव नहीं था क्योंकि वह जेपी के विरोधी थे। बिहार आंदोलन के दौरान जेपी और डाक्टर लोहिया के बीच आपसी समझ बनाने की कोशिश जरूर हुई लेकिन उसका कोई नतीजा नहीं निकला। जब जेपी लखनऊ आए थे तब डाक्टर लोहिया गंभीर रूप से बीमार थे। जेपी वहां 12 दिन रुके लेकिन दोनों नेताओं के बीच बातचीत नहीं हो सकी और बाद में लोहिया जी का निधन हो गया। इसके बाद जेपी ने अपना आंदोलन शुरू किया जिसकी परिणति आपातकाल के रूप में हुई।

मोरारजी और चंद्रशेखर बनना चाहते थे प्रधानमंत्री

राजनाथ शर्मा ने आपातकाल और जेपी आंदोलन की अंदरूनी कहानी बताते हुए कहा कि चंद्रशेखर ने आखिरी समय तक इंदिरा गांधी और जयप्रकाश नारायण के बीच समझौता कराने की पूरी कोशिश की थी। संपूर्ण क्रांति का कोई ठोस नतीजा इसलिए नहीं निकला क्योंकि मोरारजी देसाई और चंद्रशेखर दोनों ही प्रधानमंत्री पद की दौड़ में थे। इन दोनों नेताओं के आपसी टकराव की वजह से आंदोलन तो जरूर बड़ा हो गया लेकिन भीतर टकराव बढ़ गया। इसे किसी भी सूरत में क्रांति नहीं कहा जा सकता बल्कि यह पूरी तरह से एक प्रतिक्रांति थी।