चंबल की दायीं मुख्य नहर की स्थानीय सिंचाई विभाग के कार्यालय की जमीन पर अस्पताल बनाने के नाम पर चिकित्सा विभाग को देने के बाद दो दिन पहले परिसर में लगे सैंकड़ों आसमान छू रहे पेड़ों को जमींदोज किया
मांगरोल। चंबल की दायीं मुख्य नहर की स्थानीय सिंचाई विभाग के कार्यालय की जमीन पर अस्पताल बनाने के नाम पर चिकित्सा विभाग को देने के बाद दो दिन पहले परिसर में लगे सैंकड़ों आसमान छू रहे पेड़ों को जमींदोज किया तो उन पर बसेरा कर रहे पक्षी कराह उठे।
घोंसलों में पल रहे चूजे आसमान में मुक्त उड़ान भरते, इससे पहले ही जीवन और मौत के बीच धरातल पर संघर्ष करते नजर आए। तड़के चार बजे यहां लगे पेड़ों को धराशायी कर दिया गया। इस बात से बेखबर पेड़ों पर निवास कर रहे पक्षी अपनी जान बचाने को आतुर हो गए। घोंसलों में पल रहे चूजे संसार देखने से पहले ही मौत की आगोश में चले गए।
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अब नहीं गूंजेगा परिंदों का कलरव
इन पेड़ों पर बसेरा कर अपना दाना-पानी ले रहे व अपने परिवार को पाल रहे तोता मैना, कबूतर, कौए, कोयल, चिड़ियों समेत विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की चहचहाहट अब बीते जमाने की बात हो गई है। किसानों के लिए कार्यालय का महत्व बता इसका विरोध करने वालों को भी कानोंकान खबर नहीं लगी तो सिंचाई विभाग के अधिकारी जमीन को अस्पताल प्रशासन को सुपुर्द करने का पत्र बनाने में जुट गए, लेकिन इन परिंदों की खैर खबर किसी ने नहीं ली। बहरहाल कुछ बचे पेड़ों पर फिर पक्षियों की किलकारियां गूंज रही है। लेकिन घोंसलों के चूजे कराहने को मजबूर है। तो बचे पेड़ों को भी भविष्य में जमींदोज करेंगे तो फिर इन मूक परिंदों की जान आफत में आने की तैयारी है।