
बारां। उस मासूम ने दुनिया में आंखें खोली ही थीं कि अपनों ने उसे मौत के मुंह में छोड़ दिया। जन्म के कुछ ही घंटे बाद लाल कपडे में लपेटकर उसे नेशनल हाईवे-76 किनारे बड़े-बड़े ट्रकों के बीच फेंक दिया गया। वह सड़क किनारे पड़ा रोता रहा, लेकिन किस्मत को कुछ और मंजूर था। उसी वक्त वहां से गुजर रहे तीन बाइक सवार युवकों की नजर उस पर पड़ गई। उन्होंने मासूम को तत्काल अस्पताल पहुंचाकर जिंदगी बचा ली।
मामला कोटा रोड फोरलेन पर सोया प्लांट के पास का है। मंगलवार शाम करीब 7 बजे हाईवे किनारे एक कार आकर रुकी। उसमें सवार लोगों ने लाल कपड़े में लिपटे नवजात को सड़क किनारे फेंका और चले गए। वहां से गुजर रहे बाइक सवार युवकों को संदेह हुआ, पास जाकर देखा तो नवजात रो रहा था। युवकों ने उसे उठाया और करीब पांच किलोमीटर दूर जिला अस्पताल पहुंचाया। सूचना पर सदर थाना प्रभारी नवल किशोर मीणा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। वहीं पुलिस की एक टीम एएसआई पुरुषोत्तम के नेतृत्व में जिला अस्पताल पहुंची।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. पुनीत परूथी ने बताया कि नवजात का वजन 2.600 किलोग्राम है और उसकी हालत स्थिर है। संभवतः उसका जन्म घर पर ही हुआ है। उसे एसएनसीयू में भर्ती किया गया है। बाल कल्याण समिति ने नवजात को संरक्षण में ले लिया है। पुलिस नवजात को फेंकने वालों की तलाश कर रही है।
चिकित्सकों के अनुसार नवजात को जन्म के दो घंटे के भीतर ही सड़क पर छोड़ दिया गया। शरीर पर खून के निशान थे और नाल भी ठीक से नहीं काटी गई थी। उसके शरीर पर हल्की खरोंच के निशान भी मिले हैं।
पुलिस की सूचना पर बाल कल्याण समिति के सदस्य भी अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड पहुंचे। बाल कल्याण समिति के संरक्षण में नवजात का एसएनसीयू वार्ड में उपचार चल रहा है। बाल कल्याण समिति अध्यक्ष एडवोकेट ओपी मेहता ने बताया कि पुलिस की सूचना पर समिति के सदस्य अस्पताल पहुंचे थे। पुलिस ने नवजात को समिति के समक्ष पेश किया, जिसके बाद समिति ने उसे संरक्षण में ले लिया। फिलहाल मासूम की देखभाल और उपचार जिला अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में किया जा रहा है।