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बारां वन मंडल में 10 करोड़ की गड़बड़ी: ‘क्लीन चिट’ से उठे सवाल, एजेंसी ने रोका भुगतान, करोड़ों का प्रोजेक्ट संकट में

Baran Forest Division Scam: बारां वन मंडल में करीब 10 करोड़ रुपए के वृक्षारोपण और निर्माण कार्यों में गड़बड़ी के आरोपों पर 3,500 पन्नों की जांच रिपोर्ट को वन विभाग ने एक पन्ने के आदेश से खारिज कर दिया।
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बारां

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Akshita Deora

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विकास सिंह

Aug 15, 2026

baran forest division scam

फोटो: पत्रिका

विकास सिंह

बारां वन मंडल में करीब 10 करोड़ रुपए के वृक्षारोपण और निर्माण कार्यों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले की लंबी-चौड़ी जांच रिपोर्ट को वन विभाग ने महज एक पन्ने के आदेश से खारिज कर दिया। इससे 69 कार्यस्थलों का भुगतान रोकने के बजाय उसका रास्ता साफ हो गया। वन विभाग की क्लीन चिट पर परियोजना को फंड दे रही फ्रांसीसी विकास एजेंसी (एएफडी) ने सवाल खड़े कर दिए हैं।

AFD ने गत 4 अगस्त को एक पत्र लिखकर लंबित भुगतान के लिए एनओसी देने से इनकार कर दिया। एजेंसी ने फर्जी लेबर रिकॉर्ड, मेजरमेंट बुक और VFPMC खातों में गड़बड़ी की शिकायत अपनी अलग जांच यूनिट को सौंप दी है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर धोखाधड़ी साबित हुई तो राजस्थान में चल रही 1,185.29 करोड़ रुपए की पर्यावरण परियोजनाओं की भविष्य की फंडिंग प्रभावित हो सकती है। सवाल उठ रहा है कि 3,500 पन्नों की गंभीर जांच रिपोर्ट को एक पन्ने में खारिज करने की जल्दबाजी किसके दबाव में हुई?

दरअसल यह पूरा मामला प्रदेश की वन एवं जैव विविधता विकास परियोजना से जुड़ा है, जो मार्च 2023 से मार्च 2031 तक चलेगी और जिसकी कुल लागत 1,693.91 करोड़ रुपए है। इसमें करीब 70 फीसदी यानी 1,185.29 करोड़ रुपए फ्रांस की एएफडी एजेंसी दे रही है, जबकि बाकी राशि राज्य सरकार वहन करेगी। यह परियोजना राज्य के 13 जिलों में चल रही है। एएफडी ने 2008 से अब तक भारत में 48 परियोजनाओं के लिए कुल 3.1 अरब यूरो देने की प्रतिबद्धता जताई है। अब आगे की जांच पर ही तय होगा कि इस भारी-भरकम फंडिंग का भविष्य क्या रहेगा।

ये मिला था जांच में

  1. पूर्व सीसीएफ जयपुर राजीव चतुर्वेदी की सतर्कता टीम ने पाया कि कंटूर ट्रेंच और तलाई खुदाई में मजदूरों की बजाय मशीनों का इस्तेमाल किया गया। खाई की चौड़ाई 45 सेंटीमीटर होनी चाहिए थी, लेकिन कई जगह यह 55-60 सेंटीमीटर तो कहीं 175 सेंटीमीटर तक मिली, जो मशीन से खुदाई का साफ संकेत है।
  2. ग्राम वन सुरक्षा समिति के सिर्फ 22 सदस्यों के नाम पर 50 दिनों में 8,713 मानव दिवस का काम दिखाकर 24.83 लाख रुपए का भुगतान कर दिया गया, जो व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है।
  3. डाबर ‘बी’ कार्यस्थल पर रिकॉर्ड में 19,000 पौधे लगाने का भुगतान दर्शाया गया था, जबकि मौके पर जांच टीम को सिर्फ 4,930 पौधे मिले। इनमें भी केवल 794 पौधे जीवित थे। यानी वास्तव में सिर्फ करीब 3.78 फीसदी पौधे ही जीवित बचे।

मुख्यालय का बचाव और सवाल

  1. वन विभाग मुख्यालय ने 7 जुलाई 2026 के आदेश में कहा कि जांच मानसून के बाद हुई थी, इसलिए बारिश से जमीन की स्थिति बदल गई होगी।

सवाल: बारिश से मिट्टी की स्थिति बदल सकती है, लेकिन मशीन से खोदी गई खाई की तय चौड़ाई का तकनीकी रिकॉर्ड कैसे बदल सकता है?

  1. एक तरफ कहा गया कि 69 कार्यस्थलों पर कोई बड़ी कमी नहीं मिली और भुगतान सही तरीके से हुआ। वहीं दूसरी तरफ उसी आदेश में डीसीएफ और एसीएफ स्तर के अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई।सवाल: अगर सब कुछ सही था तो कार्रवाई की सिफारिश क्यों की गई?