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विकास सिंह
बारां वन मंडल में करीब 10 करोड़ रुपए के वृक्षारोपण और निर्माण कार्यों में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। इस मामले की लंबी-चौड़ी जांच रिपोर्ट को वन विभाग ने महज एक पन्ने के आदेश से खारिज कर दिया। इससे 69 कार्यस्थलों का भुगतान रोकने के बजाय उसका रास्ता साफ हो गया। वन विभाग की क्लीन चिट पर परियोजना को फंड दे रही फ्रांसीसी विकास एजेंसी (एएफडी) ने सवाल खड़े कर दिए हैं।
AFD ने गत 4 अगस्त को एक पत्र लिखकर लंबित भुगतान के लिए एनओसी देने से इनकार कर दिया। एजेंसी ने फर्जी लेबर रिकॉर्ड, मेजरमेंट बुक और VFPMC खातों में गड़बड़ी की शिकायत अपनी अलग जांच यूनिट को सौंप दी है। साथ ही चेतावनी भी दी है कि अगर धोखाधड़ी साबित हुई तो राजस्थान में चल रही 1,185.29 करोड़ रुपए की पर्यावरण परियोजनाओं की भविष्य की फंडिंग प्रभावित हो सकती है। सवाल उठ रहा है कि 3,500 पन्नों की गंभीर जांच रिपोर्ट को एक पन्ने में खारिज करने की जल्दबाजी किसके दबाव में हुई?
दरअसल यह पूरा मामला प्रदेश की वन एवं जैव विविधता विकास परियोजना से जुड़ा है, जो मार्च 2023 से मार्च 2031 तक चलेगी और जिसकी कुल लागत 1,693.91 करोड़ रुपए है। इसमें करीब 70 फीसदी यानी 1,185.29 करोड़ रुपए फ्रांस की एएफडी एजेंसी दे रही है, जबकि बाकी राशि राज्य सरकार वहन करेगी। यह परियोजना राज्य के 13 जिलों में चल रही है। एएफडी ने 2008 से अब तक भारत में 48 परियोजनाओं के लिए कुल 3.1 अरब यूरो देने की प्रतिबद्धता जताई है। अब आगे की जांच पर ही तय होगा कि इस भारी-भरकम फंडिंग का भविष्य क्या रहेगा।
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Updated on:
15 Aug 2026 08:41 am
Published on:
15 Aug 2026 08:41 am
