Rajasthan News: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति को लेकर राजस्थान सरकार ने नए आदेश जारी किए हैं। अब कॉमर्शियल और औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ताओं को गैस प्राप्त करने के लिए संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर के पास रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा।
Rajasthan Government Issue New Order: मध्य पूर्व क्षेत्र में तनाव के दौर में कॉमर्शियल एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में सुधार के तहत राज्य सरकार की ओर से नए आदेश जारी किए गए हैं। जिला कलक्टर रोहिताश्व सिंह तोमर ने बताया कि शुरूआत में एलपीजी की सभी कॉमर्शियल सप्लाई रोक दी गई थी।
जिसे बाद में निर्धारित व सीमित मात्रा में शुरू किया गया। कॉमर्शियल एलपीजी पर निर्भर अर्थव्यवस्था के विभिन्न क्षेत्रों में परेशानी को कम करने के लिए नए आदेश जारी हुए हैं, इसके तहत अब सभी कॉमर्शियल व औद्योगिक एलपीजी उपभोक्ता अपनी संबंधित ऑयल मार्केटिंग कंपनी के डिस्ट्रीब्यूटर के पास रजिस्ट्रेशन करवाएंगे। उपभोक्ता के रजिस्ट्रेशन के बिना किसी भी कॉमर्शियल एलपीजी का वितरण नहीं किया जाएगा।
यदि उपभोक्ता ऐसे क्षेत्र में रहता है जहां किसी सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (सीजीडी) कंपनी के माध्यम से पीएनजी लाइनें उपलब्ध हैं, तो उपभोक्ता को सबसे पहले लागू रजिस्ट्रेशन शुल्क का भुगतान करके पीएनजी कनेक्शन के लिए सीजीडी के साथ रजिस्टर करना होगा, इसके बाद, जब तक सीजीडी द्वारा वास्तविक कनेक्शन नहीं दे दिया जाता, तब तक उपभोक्ता कॉमर्शियल एलपीजी का लाभ उठा सकेगा।
कोई उपभोक्ता ऐसे क्षेत्र में रहता है जहां कोई सीजीडी कंपनी नहीं है, या जहां पीएनजी की कोई पाइपलाइन उपलब्ध नहीं है, तो कॉमर्शियल एलपीजी प्राप्त करने के लिए यह प्रावधान लागू नहीं होंगे।
पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सर्कुलर के अनुसार छूट प्राप्त श्रेणियों में शामिल सभी उपभोक्ताओं को उनकी आवश्यकता का 100 प्रतिशत घरेलू एलपीजी सिलेंडरों के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।
इनमें सरकारी अस्पताल, स्कूल और कॉलेज, छात्रावास, सरकारी कार्यालयों से जुड़ी कैंटीन, पुलिस, बीएसएफ और सीआईएसएफ के मेस, रक्षा प्रतिष्ठानों की रसोई और मेस, सहकारी समिति अधिनियम के तहत सहकारी आधार पर चलाई जाने वाली कैंटीन, स्कूलों, कॉलेजों और अनुसंधान संस्थानों से जुड़ी प्रयोगशालाएं, सोसायटी अधिनियम के तहत पंजीकृत धर्मार्थ संस्थाएं, शैक्षणिक संस्थान (कोचिंग संस्थानों सहित) और उनसे जुड़े छात्रावास, निजी अस्पताल व अन्नपूर्णा कैंटीन सम्मिलित हैं।
जबकि होटल, रेस्तरां, डेयरी (सहकारी और निजी दोनों) को 60 प्रतिशत, मंदिर और उनसे जुड़ी रसोई, मैरिज गार्डन और कैटरर्स द्वारा आयोजित किए जाने वाले शादी के कार्यक्रम के लिए 50 प्रतिशत, धार्मिक त्योहार के लिए 50 प्रतिशत, थोक आपूर्ति वाले औद्योगिक ग्राहक व पैक्ड आपूर्ति वाले औद्योगिक ग्राहक को 40 प्रतिशत आपूर्ति की जाएगी।