बरेली

300 बेड, महिला व जिला अस्पताल में भगवान भरोसे मरीज, शासन की छापेमारी में बेनकाब हुआ स्वास्थ्य विभाग, ये सुविधाएं ठप

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शासन को जो चकाचौंध भरी रिपोर्टें भेज रहे हैं, उनकी हकीकत शुक्रवार को सामने आ गई। फर्जीवाड़े की आशंका के बीच शासन से गठित उच्चस्तरीय टीमों ने जिले के प्रमुख अस्पतालों पर अचानक छापा मारकर निरीक्षण किया तो स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर उजागर हो गई।

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Dec 26, 2025
निरीक्षण करती टीम

बरेली। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी शासन को जो चकाचौंध भरी रिपोर्टें भेज रहे हैं, उनकी हकीकत शुक्रवार को सामने आ गई। फर्जीवाड़े की आशंका के बीच शासन से गठित उच्चस्तरीय टीमों ने जिले के प्रमुख अस्पतालों पर अचानक छापा मारकर निरीक्षण किया तो स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाल तस्वीर उजागर हो गई। जिला अस्पताल, महिला अस्पताल और तीन सौ बेड अस्पताल में अव्यवस्थाओं, खराब उपकरणों, स्टाफ की भारी कमी और लापरवाही की परत-दर-परत पोल खुल गई। औचक निरीक्षण की खबर मिलते ही विभागीय अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। फाइलें इधर-उधर दौड़ती रहीं और जिम्मेदारों के चेहरे उतर गए।

स्वास्थ्य सेवाओं की जमीनी सच्चाई जानने के लिए लखनऊ मंडल के अपर निदेशक (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डा. जीपी गुप्ता सुबह करीब 8:10 बजे अचानक जिला अस्पताल पहुंच गए। सबसे पहले उन्होंने मेडिकल सुपरिटेंडेंट डा. एलके सक्सेना से जवाब-तलब किया, फिर पैथोलाजी और एक्सरे विभाग में पहुंचकर व्यवस्थाओं की हकीकत परखी। पैथोलाजी में खून व यूरिन जांच की स्थिति देखी गई, एक्सरे रूम में तैनात डॉक्टरों की जानकारी ली गई और ओटी में जाकर सर्जरी से जुड़ी परेशानियों पर सवाल दागे गए। एडी डा. गुप्ता ने स्पष्ट कहा कि लेजर सर्जरी समेत जिन उपकरणों की कमी है, उनका प्रस्ताव तत्काल शासन को भेजा जाए, ताकि स्वीकृति में देरी न हो। इसके बाद उन्होंने पुरुष वार्ड, बच्चा वार्ड, इमरजेंसी, कोल्ड वेव वार्ड और रैन बसेरे का निरीक्षण कर साफ-सफाई और व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताई।

पर्चों पर दवाइयां न लिखने पर फटकार

निरीक्षण के दौरान जेडी डा. एसके ध्रुव ने डेंटल सर्जन के कक्ष में देखा कि मरीज के पर्चे पर नाम-पता तो लिखा जा रहा है, लेकिन दवाइयों का पूरा विवरण गायब है। इस पर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए सभी दवाएं स्पष्ट रूप से लिखने के निर्देश दिए। एक अन्य सर्जन के यहां ओपीडी रजिस्टर देखकर उन्होंने कहा कि ऐसे रिकार्ड सीएमएस कार्यालय में होने चाहिए।

तीन सौ बेड अस्पताल में बदहाली की इंतहा

उधर, ज्वाइंट डायरेक्टर (चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) डा. एसके ध्रुव के नेतृत्व में टीम तीन सौ बेड अस्पताल पहुंची। सीएमएस डा. इंतजार अली के बाहर होने पर डिप्टी डीटीओ डा. अमित कुमार टीम के साथ रहे। यहां हालात और भी ज्यादा शर्मनाक मिले। अस्पताल में लगी एक्सरे मशीन लंबे समय से खराब पड़ी मिली, जिससे मरीजों की जांच ठप थी। पैथोलाजी लैब में खून की जांच के लिए लगी सीबीसी मशीन भी शोपीस बनी हुई थी। करोड़ों रुपये खर्च कर लगाया गया ऑक्सीजन प्लांट तक खराब सेंसर के कारण बेकार पड़ा मिला। सुरक्षा व्यवस्था भी पूरी तरह राम भरोसे मिली। स्टाफ ने बताया कि हाल ही में सीटी स्कैन यूनिट में लगे सभी छह एसी के तार चोरी हो गए। इंटरनेट केबल काट दी गई और सीसीटीवी कैमरे तक उखाड़ कर फेंक दिए गए। चोरी की लगातार घटनाओं से अस्पताल कर्मी दहशत में हैं। टीम से गार्ड की तैनाती की मांग की गई।

टायलेट देख भड़के अधिकारी

जिला, महिला और तीन सौ बेड अस्पताल तीनों जगह टायलेट्स की हालत बद से बदतर मिली। गंदगी, सीलन, टूटी सीटें और गुटखा-पान की पीक से चोक पाइप लाइनें देख अधिकारियों का पारा चढ़ गया। वार्डों में भी गंदगी पर सख्त निर्देश दिए गए। निरीक्षण में यह भी सामने आया कि तीन सौ बेड अस्पताल में अब तक मानव संसाधन विभाग (एचआर) ही नहीं है। यहां एक भी डॉक्टर की स्थायी नियुक्ति नहीं हुई है। जिला अस्पताल के स्टाफ के सहारे किसी तरह काम चलाया जा रहा है। शासन की टीमों ने डॉक्टरों व अन्य स्टाफ की कमी से जुड़े पूरे रिकार्ड तलब कर लिए हैं।

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