उत्तर प्रदेश के बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग (Basic Education Depart) ने आदेश जारी करके जनगणना का काम कर रहे शिक्षकों को गोवंश के लिए भूसे का इंतजाम (Collect Straw For Cows) करने के लिए कहा है। BSA के आदेश पर शिक्षकों ने कड़ी आपत्ति जताई है। सरकारी आदेश वायरल होने के बाद बरेली जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण दिया है।
बरेली में बेसिक शिक्षा विभाग के नए आदेश से शिक्षकों में गुस्सा है। शिक्षकों ने बरेली में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) के आदेश पर कड़ा विरोध जताया है। BSA के आदेश में वर्तमान में जनगणना का काम कर रहे शिक्षकों को बेसहारा गोवंश के भरण-पोषण के लिए भूसे का इंतजाम करने के लिए कहा गया है। सरकारी आदेश में हर स्कूल को 46 किलो और हर खंड को कुल 100 क्विंटल भूसा जुटाने की जिम्मेदारी दी गई है।
बरेली में बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) ने डीएम के आदेश का हवाला देते हुए सभी खंड शिक्षा अधिकारियों (BEO) को निर्देश जारी किए हैं कि स्कूलों और शिक्षकों के माध्यम से भूसा जुटाया जाए। BSA के पत्र में साफ चेतावनी दी गई है कि नियम का उल्लंघन करने वाले स्कूलों और शिक्षकों के खिलाफ कड़ी विभागीय कार्रवाई की जाएगी। BSA के इस आदेश के बाद नवाबगंज, भोजीपुरा और भुता क्षेत्र के खंड शिक्षा अधिकारियों ने अपने-अपने स्तर पर निर्देश जारी कर दिए हैं।
बरेली में 22 मई को नवाबगंज खंड शिक्षा अधिकारी द्वारा जारी पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस आदेश की कॉपी BSA और पशु चिकित्सा अधिकारी को भी भेजी गई। विभाग ने सभी विद्यालयों को निर्देश दिया है कि वे अपने स्तर पर भूसा की व्यवस्था करें और निर्धारित कार्यालयों में जमा कराएं। भूसा जमा करने के बाद रसीद भी अनिवार्य रूप से उपलब्ध करानी होगी, ताकि लक्ष्य की निगरानी की जा सके।
प्रशासन ने इस कार्य को एक सप्ताह के अंदर पूरा करने का आदेश दिया है। सरकारी आदेश के बाद शिक्षकों में गुस्सा है। शिक्षक इस फैसले का कड़ा विरोध कर रहे हैं। शिक्षकों का कहना है कि आज भूसा लाने के लिए कहा जा रहा है तो कल गोबर उठाने के लिए कहा जाएगा।
बरेली में सरकारी आदेश के बाद उपजे विवाद पर यूनाइटेड टीचर्स एसोसिएशन (यूटा) ने कड़ा ऐतराज जताया है। यूटा के जिलाध्यक्ष एवं प्रदेश उपाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह ने कहा- शिक्षकों का मुख्य कार्य पढ़ाई कराना है, न कि भूसा इकट्ठा करना। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसे अव्यवहारिक आदेश नहीं रोके गए तो शिक्षक संगठन विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।
यूटा के मीडिया प्रमुख सतेंद्र पाल सिंह ने इसे पूरी तरह अवैधानिक बताया। जिला उपाध्यक्ष रमेश मौर्या ने कहा कि यह आदेश शिक्षकों की गरिमा के विपरीत है। यदि लागू किया गया तो पूरे प्रदेश में संगठन स्तर पर विरोध प्रदर्शन किया जाएगा। जिला कोषाध्यक्ष हेमंत कुमार ने बताया कि शिक्षक वर्तमान में जनगणना जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में व्यस्त हैं। बढ़ते वर्कलोड के कारण वे पहले से तनाव में हैं। ऐसे गैर-व्यावहारिक आदेश उन्हें और परेशान कर रहे हैं।
BSA के आदेश के बाद मचे बवाल पर डीएम अविनाश सिंह ने सफाई दी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बेसहारा गोवंश की देखभाल सरकार की प्राथमिकता है। खुले में घूम रहे गोवंश को अस्थायी और स्थायी गौशालाओं में पहुंचाने का काम चल रहा है। नई गौशालाओं का निर्माण भी किया जा रहा है।
डीएम ने दावा किया कि उन्हें इस विशेष आदेश की जानकारी नहीं है, लेकिन गोवंश संरक्षण के लिए प्रशासन हर स्तर पर प्रयासरत है। हर ब्लॉक में भूसा बैंक बनाए गए हैं। गौशालाओं में हरा चारा और भूसे की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए चारागाह विकसित किए जा रहे हैं तथा किसानों से हरा चारा खरीदने की व्यवस्था भी की गई है।
बरेली में BSA के आदेश पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने प्रतिक्रिया दी है। अखिलेश ने 'X' पर लिखा- अध्यापकों को भूसा जुटाने के काम पर लगाने से अच्छा होगा कि भाजपा अपनी नैतिकता का भंडार खोल के दे दे, जहां भूसा ही भूसा भरा है और कुछ नहीं। अखिलेश ने अपनी पोस्ट के अंत में लिखा- निंदनीय!