बरेली

हाईकोर्ट का आदेश- घर पर नमाज पढ़ने के लिए न इकट्ठा करें भीड़, सार्वजनिक शांति के लिए यह जरूरी

Allahabad High Court Namaz at Home Order : बरेली नमाज विवाद पर इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा आदेश- घर पर नमाज पढ़ने के लिए भीड़ न जुटाएं। कोर्ट ने सार्वजनिक शांति बनाए रखने के लिए जिला प्रशासन और याचिकाकर्ताओं को दिए जरूरी निर्देश।
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Updated: 1 Apr 2026, 8:17 PM IST
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Court order Symbolic Image, PC- Patrika

बरेली : उत्तर प्रदेश के बरेली में घर में नमाज पढ़ने से रोकने को लेकर दाखिल याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई जस्टिस सरल श्रीवास्तव और जस्टिस गरिमा प्रसाद की डिवीजन बेंच में हुई। अदालत में बरेली के डीएम अविनाश सिंह और एसएसपी अनुराग आर्य पेश थे। सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने पक्ष रखा।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि प्रस्तुत एफिडेविट से यह स्पष्ट होता है कि कुछ लोग भीड़ जुटाकर नमाज पढ़ते हैं। याचियों ने अदालत को आश्वासन दिया कि वे आगे किसी भी प्रकार की भीड़ नहीं जुटाएंगे। अदालत ने इसके बाद अधिकारियों को आदेश दिया कि 151 के तहत जारी चालान वापस लिया जाए। इसी आदेश के साथ कोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया।

16 जनवरी को नमाज अदा करने को लेकर हुआ था विवाद

अधिकारियों ने हलफनामे में बताया कि 16 जनवरी को जिस घर में नमाज अदा की जा रही थी, वह याची का घर नहीं था, बल्कि हसीन खान का घर था। इस घर में दूसरे गांव से मौलवी बुलाकर नमाज अदा की जा रही थी। अधिकारियों ने यह भी बताया कि याची तारिक खान को पहले एक ही स्थान पर मस्जिद और मदरसा बनाने से रोका गया था, लेकिन 16 जनवरी को किसी को भी नमाज अदा करने से रोका नहीं गया था।

घर में नमाज पढ़ने से रोकने पर दायर की गई थी याचिका

याचिका में शिकायत की गई थी कि याची और अन्य लोगों को अपने ही घर में नमाज पढ़ने से शासन द्वारा रोका जा रहा है। अदालत ने सुनवाई के दौरान इस बात पर ध्यान दिया कि याचियों ने आगे ऐसी किसी गतिविधि में भाग न लेने का स्पष्ट आश्वासन दिया है। कोर्ट ने कहा कि यह आदेश सार्वजनिक शांति बनाए रखने और किसी भी प्रकार की भीड़ जुटाने वाली गतिविधियों को रोकने के उद्देश्य से दिया गया है।

सुनवाई के बाद यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन और याचियों के बीच विवाद को शांतिपूर्ण ढंग से हल किया गया। अदालत ने यह सुनिश्चित किया कि भविष्य में किसी के धार्मिक अधिकारों का उल्लंघन न हो और किसी भी प्रकार की भीड़ जुटाने वाली गतिविधियों पर नजर रखी जाए। इस तरह याचिका को न्यायपूर्ण और संतुलित तरीके से निस्तारित किया गया।

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1 Apr 2026, 8:17 PM IST
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