जिले के सौ गांवों को कुपोषण मुक्त किया जाने का लक्ष्य था, इसमें से चालीस गांवों को अभी भी कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सका है।
बरेली। आंगनबाड़ी वर्कर और संबंधित सीडीपीओ का वेतन रोक दिया गया है। लापरवाही बरतने की वजह से यह कार्रवाई की गई है। दरअसल कुपोषण मुक्त गांव बनाने के अभियान में 40 गांव पीछे रह गए हैं। इन्हीं गांवों की आंगनबाड़ी वर्कर और सम्बंधित सीपीडीओ का वेतन रोका गया है। जिले के सौ गांवों को कुपोषण मुक्त किया जाने का लक्ष्य था। इसमें से चालीस गांवों को अभी भी कुपोषण मुक्त नहीं किया जा सका है। इस मामले में यहां के सपीडीओ और आंगनबाड़ी वर्कर को गैरजिम्मेदार मानते हुए यह सख्ती की गई है। सीडीओ सत्येंद्र कुमार ने कहा कि जब तक गांव पूरी तरह से कुपोषण मुक्त नहीं होगा तब तक वेतन भी नहीं मिलेगा।
प्रभावी कार्रवाई हो
सीडीओ ने यह भी निर्देशित किया कि इन कुपोषण मुक्त से अवशेष गांवो में जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ डाक्टर भी जाये और यहां पर कुपोषण मुक्त की प्रभावी कार्यवाही हो। कुपोषण मुक्त हेतु निर्धारित मानक है उन्हे पूर्ण कराये। आंगनवाडी केन्द्रो पर बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं के लिये पुष्टाहार की उपलब्धता है। माह की 5, 15, व 25 तारीख को पुष्टाहार वितरण होता है। आंगनवाडी केन्द्र में पंजीकृत बच्चे व महिलायें अनिवार्य रुप से पुष्टाहार प्राप्त कर उसका सेवन करें।
लापरवाही न हो
सीडीओ ने जिला कार्यक्रम अधिकारी, सीडीपीओ को निर्देशित किया कि पुष्टाहार वितरण दिवसों पर व्यापक, संघन निरीक्षण करें यदि केन्द्र बन्द मिले तो आंगनवाडी कार्यकत्री की बर्खास्तगी की कार्यवाही करें। पुष्टाहार प्रत्येक दशा में शत प्रतिशत बच्चो व गर्भवती महिलाओं को मिले और इसमे लापरवाही न बरती जाए।