गांधी उद्यान में बरेली स्मार्ट सिटी की महंगी नाकामी खुलकर सामने आ गई है। करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से लगाया गया म्यूजिकल फाउंटेन और लाइट सिस्टम महीनों से ठप पड़ा है, जिससे स्मार्ट सिटी के नाम पर किए गए दावों की हवा निकल गई है।
बरेली। गांधी उद्यान में बरेली स्मार्ट सिटी की महंगी नाकामी खुलकर सामने आ गई है। करीब 4 करोड़ रुपये की लागत से लगाया गया म्यूजिकल फाउंटेन और लाइट सिस्टम महीनों से ठप पड़ा है, जिससे स्मार्ट सिटी के नाम पर किए गए दावों की हवा निकल गई है। जिस परियोजना को शहर की शान और आकर्षण बनाया जाना था, वही आज लापरवाही और लूट-लचर व्यवस्था की मिसाल बन गई है।
करोड़ों रुपये फूंककर तैयार किया गया यह हाईटेक सिस्टम समय पर रखरखाव के अभाव और तकनीकी खामियों के चलते पूरी तरह जवाब दे चुका है। फाउंटेन बंद, लाइटें बुझी हुई और गांधी उद्यान की रौनक गायब है नज़ारा देखकर लोग पूछ रहे हैं कि आखिर जनता का पैसा किसकी जेब में गया। मामले में बरेली स्मार्ट सिटी कंपनी के एसीईओ शशिभूषण राय ने ठेकेदार एजेंसी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। नोटिस में साफ कहा गया है कि ठेकेदार ने अनुबंध की शर्तों को ताक पर रख दिया, न तो समय पर मेंटेनेंस किया गया और न ही तकनीकी खामियों को दूर किया गया।
अधिकारियों ने दो टूक चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय में सिस्टम चालू नहीं हुआ और संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो ठेकेदार की फर्म पर ब्लैकलिस्टिंग की कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही अनुबंध उल्लंघन के तहत अन्य दंडात्मक कदम भी उठाए जा सकते हैं। गांधी उद्यान आने वाले नागरिकों में भारी नाराजगी है। लोगों का कहना है कि स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ शिलान्यास और उद्घाटन होते हैं, रखरखाव पर कोई ध्यान नहीं देता। अब जनता जवाब चाहती है, चार करोड़ रुपये की जवाबदेही कौन लेगा?